बाराबंकी। जनपद के सिविल कोर्ट परिसर में देर रात हुई कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना और नोटिस के जेसीबी मशीन लगाकर अधिवक्ताओं के चैंबर तोड़ दिए गए, जिससे बार एसोसिएशन समेत बड़ी संख्या में वकीलों में भारी आक्रोश फैल गया। घटना की जानकारी मिलते ही देर रात ही अधिवक्ता मौके पर जुटने लगे और देखते ही देखते कोर्ट परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रशासनिक टीम ने अचानक जेसीबी मशीन के जरिए चैंबरों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। कई अधिवक्ताओं का कहना है कि उनके जरूरी दस्तावेज, फाइलें और अन्य सामान चैंबर के अंदर ही मौजूद थे, जिन्हें निकालने का मौका तक नहीं दिया गया। इस कार्रवाई को वकीलों ने मनमानी और तानाशाही करार देते हुए कड़ा विरोध जताया।
मौके पर पहुंचे अधिवक्ताओं ने मलबा हटाने का कार्य भी रुकवा दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। वकीलों ने साफ तौर पर कहा कि जब तक इस कार्रवाई पर स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण या हटाने का कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
विरोध बढ़ता देख प्रशासनिक अमला बैकफुट पर आ गया और जेसीबी मशीन को मौके से वापस भेजना पड़ा। इसके बाद मलबा हटाने का कार्य भी पूरी तरह बंद कर दिया गया। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे और न्यायिक कार्य से भी विरत होने पर विचार कर सकते हैं।
इस घटना ने न्यायिक व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि कोर्ट परिसर में इस तरह की कार्रवाई से पहले संवाद और नोटिस देना जरूरी होता है, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी की गई। फिलहाल पूरे मामले को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
सिविल कोर्ट में देर रात चैंबर तोड़े जाने से बवाल, वकीलों के विरोध पर कार्रवाई रुकी


