गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान को बड़ी मजबूती मिली है। गोरखपुर स्थित रेलवे सिग्नल कारखाने में अब समपार फाटकों और सिग्नल प्रणाली के लिए इन्वर्टर भी तैयार किए जा रहे हैं। इन स्वदेशी इन्वर्टरों के लगने से बिजली गुल होने की स्थिति में भी ट्रेनों को निर्बाध सिग्नल मिलता रहेगा, जिससे सुरक्षा और संचालन दोनों में सुधार हुआ है।
पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाला पूर्वोत्तर रेलवे का गोरखपुर सिग्नल कारखाना पहले से ही रूट रिले इंटरलॉकिंग उपकरण और प्वाइंट मशीनों के निर्माण के लिए जाना जाता रहा है। अब इसी कारखाने में समपार फाटकों पर लगाए जाने वाले उच्च क्षमता के इन्वर्टर भी तैयार किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 15 और वर्ष 2025-26 में अब तक 28 इन्वर्टर बनाए जा चुके हैं, जिन्हें विभिन्न समपार फाटकों पर स्थापित किया गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन इन्वर्टरों के जरिए सिग्नल प्रणाली को बैकअप पावर सप्लाई मिलती है। पहले बिजली बाधित होने पर कई स्थानों पर सिग्नलिंग प्रभावित होती थी, जिससे ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती थी या संचालन में विलंब होता था। अब इन्वर्टर सिस्टम के कारण सिग्नल, गेट संचालन और प्वाइंट मशीनें बिना रुकावट काम कर रही हैं।
गोरखपुर कारखाने में निर्मित प्वाइंट मशीनें पहले से ही देश के विभिन्न रेलवे जोनों में आपूर्ति की जा रही हैं। अब इन्वर्टर निर्माण शुरू होने से रेलवे को बाहरी खरीद पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी और लागत में भी कमी आएगी। अधिकारियों का कहना है कि मांग के अनुरूप आने वाले समय में इन्वर्टरों का उत्पादन और बढ़ाया जाएगा।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय स्तर पर निर्माण होने से गुणवत्ता पर सीधा नियंत्रण संभव है और तकनीकी सुधार भी तेजी से किए जा सकते हैं। गोरखपुर का यह सिग्नल कारखाना अब रेलवे सिग्नलिंग उपकरणों के क्षेत्र में देश के प्रमुख उत्पादन केंद्रों में शामिल हो चुका है।
सिग्नल कारखाने में बने इन्वर्टर से मजबूत हुई रेलवे सिग्नल प्रणाली, बिजली कटौती में भी ट्रेनों को निर्बाध संकेत


