लखनऊ। प्रदेश की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के लंबित आवेदनों पर विशेष ध्यान देते हुए श्रेणी तीन, चार, पांच और छह के आवेदन पत्रों में विद्यालय का यू-डायस नंबर तथा बालिका की यूनिक आईडी अनिवार्य रूप से अंकित कराने के निर्देश दिए। वैकल्पिक रूप से अपार आईडी भी दर्ज की जा रही है। उन्होंने लंबित आवेदनों में से 10 प्रतिशत का रैंडम सत्यापन 30 दिन के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल सके और किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि 75 जनपदों में कुल 60,876 रिक्त पदों के सापेक्ष चयन प्रक्रिया संचालित है। देवरिया, इटावा, फर्रुखाबाद, खीरी, औरैया और प्रतापगढ़ में भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य जिलों को भी निर्धारित समयसीमा में चयन कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि पीएमजीएसवाई-तीन के अंतर्गत शेष मार्गों का निर्माण मार्च 2026 से पहले हर हाल में पूरा कराया जाए। उन्होंने बताया कि पीएमजीएसवाई-एक और पीएमजीएसवाई-तीन के अंतर्गत स्वीकृत शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन जहां कार्य प्रगति पर हैं, वहां गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए।
बैठक में बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे पॉलिसी-2025 की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित, किफायती और गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण लीना जोहरी, अपर मुख्य सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक सरनीत कौर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग कर प्रगति रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत की जाए, ताकि सरकार की मंशा के अनुरूप लाभ सीधे जनता तक पहुंचे।





