कानपुर। होली के अवसर पर 27 फरवरी को आयोजित कानपुर बार एसोसिएशन के “सांस्कृतिक कार्यक्रम” को लेकर शहर में तीखी चर्चा और आलोचना का दौर शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के कुछ वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद कई अधिवक्ताओं और नागरिकों ने इसे “फूहड़” और “गरिमा के विपरीत” बताया है।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में मनोरंजन के नाम पर प्रस्तुत की गई कुछ प्रस्तुतियों को लेकर असहमति सामने आई। आलोचकों का कहना है कि एक प्रतिष्ठित विधिक संस्था से जुड़े आयोजन में मर्यादा और पेशे की गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए था।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज
कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और अधिवक्ताओं ने सवाल उठाए कि क्या बार एसोसिएशन जैसे मंच पर इस प्रकार की प्रस्तुति उचित है। कुछ लोगों ने इसे “त्योहार की आड़ में अनुशासनहीनता” करार दिया, जबकि अन्य ने कहा कि होली जैसे पर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रम स्वाभाविक हैं, लेकिन उनकी प्रस्तुति सुसंस्कृत और मर्यादित होनी चाहिए।
जहां एक ओर आलोचना हो रही है, वहीं कुछ अधिवक्ताओं का तर्क है कि कार्यक्रम का उद्देश्य आपसी सौहार्द और उत्सव का माहौल बनाना था। उनका कहना है कि किसी भी वीडियो क्लिप को संदर्भ से काटकर देखने से गलत संदेश जा सकता है।
हालांकि, अभी तक बार एसोसिएशन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
कानूनी पेशा समाज में नैतिकता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि क्या सार्वजनिक आयोजनों में संस्थागत छवि और पेशेवर गरिमा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, या फिर त्योहारों के अवसर पर हल्के-फुल्के कार्यक्रमों को सहज रूप से लिया जाना चाहिए।
फिलहाल, यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर संगठन की ओर से स्पष्टीकरण या दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कानपुर बार एसोसिएशन का होली पर “सांस्कृतिक कार्यक्रम” विवादों में


