कानून का उद्देश्य सिर्फ सजा नहीं, समाज में सद्भाव बनाए रखना भी है :हाईकोर्ट

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प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि कानून का उद्देश्य केवल अपराधी को दंडित करना नहीं, बल्कि समाज में शांति, सौहार्द और सद्भाव बनाए रखना भी है। अदालत ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले में की, जिसमें पत्नी से समझौते के बाद हत्या के प्रयास (धारा 307 आईपीसी) में दोषी ठहराए गए पति को राहत दी गई और उसे बरी कर दिया गया।

न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने बदायूं निवासी प्रमोद कुमार की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि विवाह भारतीय समाज में एक पवित्र बंधन है, जिसका उद्देश्य दो व्यक्तियों को शांति और स्थिरता के साथ जीवन जीने का अवसर देना है। ऐसे में यदि पति-पत्नी आपसी सहमति से अपने विवादों को समाप्त करना चाहते हैं, तो अदालत को भी इस प्रयास का सम्मान करना चाहिए।

अदालत ने कहा, “पक्षकार अपनी गलतियों पर विचार कर सकते हैं और सौहार्दपूर्ण तरीके से अपने विवादों का निपटारा कर सकते हैं, बजाय इसके कि वे अदालतों में वर्षों तक मुकदमेबाजी करें और अपने जीवन के अनमोल वर्ष बर्बाद करें।”

हाईकोर्ट ने इस आधार पर प्रमोद कुमार की धारा 307 (हत्या के प्रयास) की दोषसिद्धि को बदलकर धारा 324 (खतरनाक तरीके से चोट पहुंचाने) में परिवर्तित किया और बाद में पत्नी से समझौते को ध्यान में रखते हुए आरोपी को पूरी तरह बरी कर दिया।

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