मीरजापुर। खनन माफिया पूरी तरह बेलगाम नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि डेंजर घोषित खदानों में भी खुलेआम खनन और ब्लास्टिंग की जा रही है। नियमों को दरकिनार कर पहाड़ों का सीना छलनी किया जा रहा है, जबकि प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर चुप्पी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
10 साल का पट्टा, 3 साल में पहाड़ साफ
जानकारी के अनुसार जिन खदानों को 10 साल के पट्टे पर आवंटित किया गया, वहां महज 3 साल के भीतर ही पूरा पहाड़ गायब कर दिया गया। इसके बावजूद खनन बंद होने के बजाय और तेज कर दिया गया। इससे साफ है कि खनन निर्धारित सीमा से कहीं अधिक किया गया।
अहरौरा क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। यहां दिन ही नहीं, रात में भी अवैध खनन और ब्लास्टिंग की जा रही है। भारी मशीनें लगातार पहाड़ काट रही हैं, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।
खनन नियमों के तहत प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक खनन की अनुमति नहीं है, लेकिन मिर्जापुर में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित है। माफिया रात-दिन मशीनें चलाकर खनन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण और जनजीवन दोनों खतरे में हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बंद पड़ी खदानों में भी ब्लास्टिंग की जा रही है। जिन खदानों को सुरक्षा कारणों से बंद किया गया था, वहीं अवैध तरीके से विस्फोट कर पत्थर निकाला जा रहा है।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खनन
सूत्रों के अनुसार सोनपुर, भगौती देई, घासीपुर और लालपुर इलाकों में बड़े पैमाने पर नियम विरुद्ध खनन जारी है। इन क्षेत्रों में लगातार ट्रकों की आवाजाही और ब्लास्टिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे अवैध खेल को खनन विभाग और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का संरक्षण प्राप्त है। बिना विभागीय मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन संभव नहीं माना जा रहा।
पर्यावरण और जनजीवन पर खतरा
लगातार हो रहे खनन से
पहाड़ कमजोर हो चुके हैं
भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है
जल स्रोत सूखने लगे हैं
गांवों में कंपन और दरारें पड़ रही हैं
इसके बावजूद न तो सख्त कार्रवाई हो रही है और न ही खनन पर रोक लग पा रही है।
अब सवाल यह है कि
डेंजर घोषित खदानों में खनन कैसे हो रहा है?
बंद खदानों में ब्लास्टिंग की अनुमति किसने दी?
नियमों की निगरानी करने वाले अधिकारी क्या कर रहे हैं?
मिर्जापुर में नियम विरुद्ध खनन सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी गंभीर मामला बन चुका है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अवैध खनन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here