करीब 40 में से 30 इंस्पेक्टर जांच के दायरे में, तेजतर्रार अधिकारियों की कमी ने बढ़ाया संकट
फर्रुखाबाद। लगभग 18.85 लाख की आबादी वाला फर्रुखाबाद जिला इस समय कानून व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रहा है। जिला प्रशासन और पुलिस के दावों के विपरीत हालात बताते हैं कि सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर कमजोर हो चुकी है।
जिले में कुल लगभग 40 इंस्पेक्टर पदस्थापित हैं, लेकिन इनमें से करीब 30 इंस्पेक्टर विभिन्न विभागीय व सतर्कता जांचों में फंसे हुए हैं। सक्रिय, तेजतर्रार और अनुभवी इंस्पेक्टरों की भारी कमी ने थानों की कमान कमजोर कर दी।
सूत्रों का कहना है कि फर्रुखाबाद में तेजतर्रार एवं कड़क इंस्पेक्टरों को जानबूझकर लंबे समय से तैनात नहीं किया जा रहा।
यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति बताई जा रही है, जिसके तहत जिले में प्रभावी पुलिसिंग की क्षमता कमजोर कर दी गई है।
लोगों का आरोप है कि तेजतर्रार अधिकारियों को दूसरे जनपदों में भेजकर जिले को जानबूझकर ‘नरम पुलिसिंग ज़ोन’ में बदला गया है।
फर्रुखाबाद उन जिलों में शामिल है जहाँ माफियाओं और भूमाफियाओं पर सर्वाधिक प्रस्तावित कार्रवाइयाँ भेजी गई हैं।इसके बावजूद यहां अनुभवी इंस्पेक्टरों की कमी,सक्रिय नेतृत्व का अभाव,और संसाधनों की कमी जिले की कानून व्यवस्था को बड़ा झटका दे रही है।
जब कार्रवाई ज्यादा होनी है, अपराधी सख्ती में हों तब मजबूत पुलिस नेतृत्व की जरूरत और बढ़ जाती है, लेकिन जिले में स्थिति उलट दिखती है।
जिले के 14 थानों में से कई बड़े क्षेत्रों की पुलिसिंग अब सीमित स्टाफ के भरोसे चल रही है।
तेजतर्रार पुलिस कर्मी न होने से
गश्त कमजोर,इंटेलिजेंस धीमी,
और अपराध नियंत्रण असंतुलित हो गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी विशाल आबादी और विस्तृत क्षेत्र में कमज़ोर पुलिसिंग से अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं।
कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के दावे हर मीटिंग में किए जाते हैं, लेकिन जब स्टाफ कम,नेतृत्व कमजोर,जांचों में फंसे इंस्पेक्टर ज्यादा,और प्रस्तावित माफिया कार्रवाई सबसे अधिक हो
तो इन दावों की वास्तविकता पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।






