लखनऊ। राजधानी लखनऊ के काकोरी कस्बे में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से जुड़े एक ग्राहक सेवा केंद्र से करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। ग्राहक सेवा केंद्र का संचालक नरेंद्र कुमार बड़ी रकम की हेराफेरी कर फरार हो गया। घटना से आक्रोशित और पीड़ित खाताधारक थाना दिवस के दौरान थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। अपनी वर्षों की मेहनत की कमाई डूबने से कई खाताधारक भावुक हो गए और पुलिस के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगे।
पीड़ित खाताधारकों ने आरोप लगाया कि ग्राहक सेवा केंद्र के संचालक ने जानबूझकर उनकी जमा की गई रकम बैंक खातों में नहीं डाली और धनराशि हड़प ली। कुछ मामलों में खातों से धोखे से रकम निकालने की भी बात सामने आई है। कस्बे में सुविधा के चलते बड़ी संख्या में लोग नकद लेनदेन के लिए इसी केंद्र पर निर्भर थे, जिसका संचालक ने फायदा उठाया। जब खाताधारकों ने बार-बार अपने पैसों के बारे में पूछताछ की तो वह टालमटोल करता रहा। कुछ दिन बाद केंद्र अचानक बंद हो गया और संचालक फरार हो गया।
मामले की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पीड़ित खाताधारक एकजुट होकर बैंक शाखा पहुंचे और अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपी। खाताधारकों का आरोप है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी के बिना संभव नहीं है, इसलिए बैंक प्रबंधन भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। पीड़ितों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनकी जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग की है।
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और फरार आरोपी की तलाश की जा रही है। इंस्पेक्टर सतीश चंद्र राठौर के अनुसार, एसबीआई की अधिकृत एजेंसी जीरो मास प्राइवेट लिमिटेड के यूपी हेड ईशान की तहरीर पर 131 खाताधारकों की ओर से धोखाधड़ी समेत कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले को लेकर शुक्रवार शाम करीब सात बजे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर के साथ पीड़ित खाताधारकों की जिलाधिकारी से बैठक भी हुई। बैठक में डीएम ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पीड़ितों के हितों की रक्षा की जाएगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।






