कैसरबाग कचहरी में नगर निगम की कार्रवाई से भड़के वकील बड़ा प्रदर्शन,

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न्यायिक कामकाज ठप होने की आशंका

संवाददाता – लखनऊ

राजधानी लखनऊ आज एक बार फिर आक्रोश की लपटों में घिरी हुई है। कैसरबाग कचहरी परिसर में नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा किए गए बुलडोज़र अभियान ने वकालत जगत को हिला कर रख दिया है। प्रशासन ने सड़क किनारे बने करीब 100 से अधिक वकीलों के चैंबरों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया। इसके विरोध में वकीलों ने आज सुबह 11 बजे कैसरबाग कचहरी परिसर में विशाल प्रदर्शन का ऐलान किया है।
यह मामला केवल संपत्ति या अवैध निर्माण का नहीं बल्कि न्यायिक प्रतिष्ठान और अधिवक्ताओं की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बन गया है। वकीलों का कहना है कि नगर निगम ने बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या सामग्री हटाने का मौका दिए सीधे बुलडोज़र चलवा दिया, जिससे हजारों केस फाइलें, दस्तावेज़ और क्लाइंट रिकॉर्ड मलबे में दब गए।
बीते सप्ताह नगर निगम ने दावा किया था कि कैसरबाग कचहरी के बाहर सड़क किनारे बने कई अस्थायी ढांचे यातायात में बाधा डाल रहे हैं और सुरक्षा कारणों से उन्हें हटाना जरूरी है। शनिवार को अचानक भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ प्रशासनिक टीम पहुँची और सुबह से लेकर देर शाम तक चैंबर तोड़ने की कार्रवाई चलती रही।
कार्रवाई के दौरान कई अधिवक्ता मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे, मगर प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि यह “पूर्व निर्धारित कार्यवाही” है और सभी निर्माण “अवैध” थे। वकीलों का कहना है कि प्रशासन को कम-से-कम वैकल्पिक जगह या समय तो देना चाहिए था ताकि वे अपनी सामग्री, फाइलें और दस्तावेज़ सुरक्षित निकाल सके
लखनऊ बार एसोसिएशन और अधिवक्ता परिषद ने इस कार्रवाई को “मनमानी और अपमानजनक” बताया है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा “बिना पूर्व सूचना के, अदालत परिसर में अधिवक्ताओं के चैंबर तोड़ना सीधे-सीधे न्याय व्यवस्था पर हमला है। यह केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि अधिवक्ताओं के सम्मान पर आघात है।”
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने मुआवज़ा, नई जगह की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।
उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री स्वयं हस्तक्षेप करें और जांच के आदेश दें।
मामला केवल कानूनी समुदाय तक सीमित नहीं रहा। बीजेपी सांसद संघमित्रा मौर्य ने भी इस कार्रवाई का विरोध किया और कहा “अधिवक्ताओं के चैंबर को अवैध बताकर तोड़ना अनुचित है। पहले उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था दी जानी चाहिए थी। सरकार को तुरंत जांच के आदेश देने चाहिए।”
वहीं विपक्षी दलों ने कहा कि बुलडोज़र नीति अब न्यायिक ढांचे तक पहुँच गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने इसे “प्रशासनिक अराजकता” बताया है।
जिला प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई कचहरी परिसर के बाहर अवैध रूप से सड़क पर बने चैंबरों को हटाने की थी, ताकि जनता और एंबुलेंस का आवागमन सुगम हो सके। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि पहले ही नोटिस जारी किए गए थे, और अधिवक्ताओं को चेताया गया था।
हालांकि मौके पर मौजूद वकीलों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि “कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, यह अचानक बुलडोज़र चला देना गैरकानूनी है।
अधिवक्ताओं ने सोमवार सुबह 11 बजे कैसरबाग कचहरी परिसर में एकजुट होकर विशाल विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
इस प्रदर्शन में सैकड़ों वकीलों के शामिल होने की उम्मीद है।
बार एसोसिएशन ने संकेत दिए हैं कि यदि प्रशासन ने उचित कार्रवाई नहीं की तो न्यायिक कार्य ठप किया जा सकता है।
अदालतों में कामकाज रुकने से आम जनता के केसों की सुनवाई पर बड़ा असर पड़ेगा।
कचहरी क्षेत्र में रोज़ आने वाले लोगों का कहना है कि यदि चैंबर वाकई सड़क पर थे तो उन्हें हटाया जा सकता था, लेकिन जिस तरह से कार्रवाई की गई, वह असंवेदनशील रही।
कई लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि अधिवक्ताओं के लिए वैकल्पिक स्पेस और फाइल रिकवरी व्यवस्था तत्काल की जाए।
लखनऊ का यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर संविधानिक अधिकार और पेशेगत सम्मान का विषय बन गया है।
अधिवक्ताओं का प्रदर्शन अगर लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरे न्यायिक तंत्र पर पड़ेगा।
राज्य सरकार को अब जल्द ही कोई संतुलित कदम उठाना होगा ताकि कानून व्यवस्था, प्रशासनिक जिम्मेदारी और वकीलों का सम्मान तीनों एक साथ संतुलित रह सकें।

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