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Thursday, March 12, 2026

कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, डॉलर के मुकाबले 92.36 तक गिरा

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच गुरुवार को भारतीय रुपये पर भारी दबाव देखने को मिला। अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 35 पैसे की गिरावट के साथ अब तक के सबसे निचले स्तर 92.36 पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में यह रुपये का रिकॉर्ड निचला स्तर माना जा रहा है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.25 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला, लेकिन दिन के कारोबार के दौरान लगातार कमजोरी दर्ज करते हुए 92.36 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर की तुलना में 35 पैसे की गिरावट है और अब तक का सबसे निचला इंट्रा-डे स्तर दर्ज किया गया।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके साथ ही घरेलू शेयर बाजार में कमजोर रुझान और विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली ने भी रुपये की कमजोरी को और बढ़ा दिया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बन रहा है।
इससे पहले 9 मार्च को रुपये ने डॉलर के मुकाबले 92.35 का पिछला रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ था। वहीं बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे की गिरावट के साथ 92.01 पर बंद हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में 0.18 प्रतिशत बढ़कर 99.40 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं वैश्विक तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल वायदा कारोबार में 6.72 प्रतिशत की तेजी के साथ 98.16 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। मुंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 445.26 अंक यानी 0.58 प्रतिशत गिरकर 76,418.45 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 121.70 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,745.15 के स्तर पर बंद हुआ।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को शुद्ध आधार पर 6,267.31 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जिससे बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में रुपये पर और दबाव देखने को मिल सकता है।

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