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Monday, March 9, 2026

19वीं रमजान पर शहादत-ए-हजरत अली की याद में फर्रुखाबाद में ताबूत का जुलूस, अजादारों ने किया मातम

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फर्रुखाबाद। माह रमजान की 19वीं तारीख को शहर में शिया समुदाय की ओर से अमीरुल मोमिनीन हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में गमगीन माहौल में ताबूत का जुलूस निकाला गया। जुलूस दिल्ली खाली कूंचा स्थित मस्जिद से शुरू होकर निर्धारित मार्गों से होता हुआ हसन वजाहत के निवास तक पहुंचा। इस दौरान रोजेदार अजादारों ने नम आंखों के साथ शबीह-ए-मुबारक की जियारत की और मातम कर अपने मौला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
सोमवार सुबह फजर की नमाज के बाद करीब साढ़े पांच बजे मस्जिद में मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली ने खिताब करते हुए अमीरुल मोमिनीन हजरत अली अलैहिस्सलाम पर हुए कातिलाना हमले और उनकी शहादत का मार्मिक बयान किया। मौलाना ने कहा कि हजरत अली की शख्सियत इंसाफ, सब्र और इंसानियत की मिसाल है। उनके बयान को सुनकर मजलिस में मौजूद अजादारों की आंखें नम हो गईं और माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया।
मजलिस के बाद ताबूत का जुलूस शुरू हुआ। जुलूस में सबसे आगे बैनर चल रहा था, जिसके पीछे हजरत अब्बास अलमदार का अलम और उसके बाद इमाम का ताबूत मुबारक अकीदत के साथ उठाया गया। रोजेदार अजादार नंगे पांव जुलूस के साथ चल रहे थे और सिसकियां भरते हुए मातम कर रहे थे। जुलूस के दौरान “या अली, या अली” और “हाय अली” की सदाओं से माहौल गूंज उठा।
जुलूस जब हसन वजाहत के घर पहुंचा तो वहां दोबारा मजलिस का आयोजन किया गया। मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली ने मजलिस पढ़ते हुए हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत का जिक्र किया और अजादारों को उनके जीवन से सबक लेने की नसीहत दी। मजलिस के बाद अजादारों ने सोज-ओ-सलाम और नौहा-ख्वानी के बीच जोरदार मातम कर इमाम को पुरसा पेश किया।
इस दौरान अजादारों की ओर से गमगीन नौहे भी पढ़े गए, जिनमें “तुमसे जुदा है मौला तुम्हारा, रोजेदारों कयामत के दिन है…” जैसे कलामों ने माहौल को और अधिक भावुक बना दिया। पूरे जुलूस के दौरान रोजेदार अकीदतमंद भूखे-प्यासे रहकर इमाम की शहादत का गम मनाते रहे और अकीदत के साथ ताबूत की जियारत करते रहे।
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी तैनात रही। शांति और अनुशासन के साथ जुलूस का समापन किया गया। शिया समुदाय के लोगों ने हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत को इंसाफ, सब्र और इंसानियत का पैगाम बताते हुए उनकी याद में दुआएं कीं।

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