– ब्रेन स्ट्रोक के चलते तीन दिन से कर रहे थे जिंदगी से संघर्ष
– परिवार को रोता बिलखता छोड़ जिंदगानी को बोल दिया अलविदा
फर्रुखाबाद। यूथ इंडिया के स्टेट हेड प्रशांत कटियार के पूज्य पिता श्री हरि सिंह कटियार जी के आकस्मिक निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। ब्रेन स्ट्रोक के कारण उनका निधन हो गया,बीते सोमवार उन्हें समस्या हुई थी,गुरुवार उन्होंने अंतिम सांस ली। जिससे परिवार और शुभचिंतकों में गहरा दुःख व्याप्त है।
श्री कटियार के निधन की खबर मिलते ही उनके आवास जहानगंज के पैतृक गांव अहमदपुर देवरिया पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है। नगर के कई गणमान्य नागरिक, राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे।
परिवार के अनुसार, श्री हरि सिंह कटियार जी का अंतिम संस्कार शुक्रवार को पांचाल घाट, में संपन्न होगा। अंतिम यात्रा में परिजन, मित्र, समाजसेवी और क्षेत्रीय लोग शामिल होंगे।
श्री हरि सिंह कटियार जी अपने मिलनसार स्वभाव और समाजसेवा के लिए जाने जाते थे। वे सदैव जरूरतमंदों की सहायता में तत्पर रहते और अपने नैतिक मूल्यों के लिए समाज में सम्मानित थे। उनके पदचिन्हों और आदर्शों पर चल उनके बेटे प्रशांत ने कम उम्र में अपनी साफ सुथरी ईमानदार पहचान बना कर खुद के रूप में समाज को एक नेक दिल व्यक्तित्व दिया।उनके निधन से क्षेत्र ने एक आदर्श व्यक्तित्व खो दिया है।
प्रशांत और परिवार के लिए यह अत्यंत दुखद क्षण है। उन्होंने पिता को बचाने के भरकस प्रयास किए फर्रुखाबाद डॉ उदयराज सिंह के अस्पताल से लेकर कानपुर के प्रतिष्ठित अस्पताल और योग्य चिकित्सकों के देखरेख में इलाज कराया,लेकिन कुदरत को मंजूर नहीं था, आज गुरुवार उन्होंने शाम 4 बजे अंतिम सांस ली। और रोते बिलखते परिवार को छोड़ गोलोक सिधार गए।परिजनों और शुभचिंतकों ने इस कठिन समय में उनके परिवार को धैर्य और संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
भगवद्गीता से श्रद्धांजलि:
“न जायते म्रियते वा कदाचिन्
नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥” (भगवद्गीता 2.20)
(अर्थ: आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है। यह नित्य, शाश्वत और अविनाशी है। शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा का कभी नाश नहीं होता।)
शहरवासियों ने श्री कटियार जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि “ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करें।”