लखनऊ। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट एक निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है। इसे प्रदेश के 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य का “गेमचेंजर” माना जा रहा है, जो कृषि, उद्योग और व्यापार—तीनों क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाएगा।
जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से प्रदेश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। यह न केवल यात्री परिवहन बल्कि कार्गो और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। अनुमान है कि इसकी वार्षिक यात्री क्षमता करीब 7 करोड़ होगी, जबकि लगभग 10 लाख टन कार्गो हैंडलिंग की सुविधा विकसित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट के चलते प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी। छोटे और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे निर्यात में वृद्धि होगी। इसके साथ ही कृषि उत्पादों को भी तेजी से देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि संभव है।
जेवर एयरपोर्ट का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह रोजगार सृजन का भी बड़ा केंद्र बनेगा। निर्माण से लेकर संचालन तक लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, एयरपोर्ट के पूर्ण संचालन के बाद प्रदेश की जीडीपी में 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है, जो इसे देश के अग्रणी आर्थिक राज्यों में और मजबूत स्थिति दिलाएगा।
सरकार का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हब के रूप में स्थापित करेगा, जहां से वैश्विक कनेक्टिविटी के जरिए निवेश, व्यापार और पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।
कुल मिलाकर, जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक भविष्य को बदलने वाला एक बड़ा इंजन साबित होने जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट बनेगा यूपी की अर्थव्यवस्था का गेमचेंजर, 1 ट्रिलियन लक्ष्य को मिलेगा रफ्तार


