लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जातीय रैलियों पर रोक लगाने से जुड़ी जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने अदालत में अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा कि जातीय आधार पर रैलियों को रोकने और आपराधिक मामलों में जाति का उल्लेख न करने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसी के क्रम में पुलिस महानिदेशक ने भी संबंधित सर्कुलर जारी किया है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने सरकार के जवाब पर याचिकाकर्ता को प्रतिउत्तर दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई 17 नवंबर के लिए तय की। यह जनहित याचिका मोतीलाल यादव द्वारा दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि जातीय रैलियां समाज में विभाजन और वैमनस्य फैलाती हैं, जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
कोर्ट ने इस मामले में पहले केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्रीय निर्वाचन आयोग और प्रमुख राजनीतिक दल—कांग्रेस, भाजपा, समाजवादी पार्टी और बसपा—से भी जवाब मांगा था। अब अगली सुनवाई में सभी पक्षों के तर्कों पर विस्तृत बहस होगी।






