उन्नाव। सदर तहसील में कथित रूप से जनशक्ति ग्रुप द्वारा सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का एक और बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्रुप ने ऊसर और बंजर श्रेणी में दर्ज कई सरकारी गाटों पर कब्जा कर न केवल कॉलोनी विकसित कर ली, बल्कि निवेशकों से पैसा लेने के बावजूद उन्हें प्लॉट भी नहीं दिए गए।
सूत्रों और शिकायतकर्ताओं के अनुसार सदर तहसील क्षेत्र के हुसैन नगर में ऊसर दर्ज जमीनों पर बड़े पैमाने पर कब्जा किया गया है। आरोप है कि गाटा संख्या 1109/2, 1117, 1090 पर अवैध कब्जा किया गया।
गाटा संख्या 1089 पर भी कंपनी द्वारा कब्जा बताया जा रहा है।
बंजर में दर्ज गाटा संख्या 1093 को भी कब्जा लिया गया।
इसी तरह गाटा संख्या 1095 और 1119 पर भी अवैध कब्जे के आरोप हैं।
मामला केवल हुसैन नगर तक सीमित नहीं है। आरोप है कि
इब्राहिमाबाद में गाटा संख्या 550 पर कब्जा किया गया।
काजीखेड़ा गांव में ऊसर दर्ज जमीनों पर कब्जा करते हुए गाटा संख्या 2222 और 2223 पर अवैध कब्जा किया गया।
वहीं बंजर श्रेणी में दर्ज गाटा संख्या 2224 को भी कब्जा किए जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी जमीन पर ही कॉलोनी का मुख्य मार्ग बना दिया गया है, जो नियमों और कानून का खुला उल्लंघन है। इसके बावजूद राजस्व विभाग और तहसील स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
मामले में एसडीएम क्षितिज द्विवेदी पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि सदर तहसील में इतने बड़े पैमाने पर कब्जे के मामले सामने आने के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे भूमाफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जनशक्ति ग्रुप ने निवेशकों और आम नागरिकों से लाखों-करोड़ों रुपये वसूले, लेकिन उन्हें न तो वैध प्लॉट दिए गए और न ही धन वापसी की गई। पीड़ित निवेशक लगातार तहसील, प्रशासन और अन्य कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि महेंद्र यादव और आर.एस. चौहान का एक मजबूत सिंडिकेट सक्रिय है, जो प्रशासनिक संरक्षण में काम करता रहा। आरोप यह भी है कि गरीबों की गाढ़ी कमाई लूटकर दोनों ने अकूत संपत्ति खड़ी कर ली है।
कार्रवाई की मांग
पीड़ितों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए,सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराया जाए,दोषियों के खिलाफ एफआईआर और कुर्की की कार्रवाई हो,
और निवेशकों का पैसा वापस दिलाया जाए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि इतने गंभीर आरोपों के बाद जिला प्रशासन और शासन स्तर पर कब और क्या कार्रवाई होती है।

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