– भूमाफिया वेखौफ, डी एम के आदेश को थानेदार नें रद्दी की टोकरी में डाला
– बसपा नेता के गैंग नें दलित उत्पीड़न में फ़साने की दी धमकी
– दलित कथित पत्रकार बना भूमाफियाओ की कठपुतली

फर्रुखाबाद। थाना कादरी गेट क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक गरीब व अनाथ ब्राह्मण युवक की पुश्तैनी आराजी पर कथित भूमि माफिया द्वारा जबरन कब्जा करने और अवैध प्लाटिंग कराने की कोशिश की जा रही है। पीड़ित युवक ने प्रशासन, पुलिस और अब मुख्यमंत्री तक न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्रवाई शून्य बनी हुई है। इस पूरे खेल में चर्चित तेल माफिया बसपा का एक पूर्व जिला अध्यक्ष समेत इनको कुछ दलित गुर्गे और वर्ग विशेष के लोग शामिल हैं।
थाना कादरी गेट अंतर्गत दीनदयाल बाग, अमेठी कोहना निवासी पीड़ित युवक विवेक मिश्रा पुत्र स्व. कमलेश नारायण मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनकी निजी पुश्तैनी भूमि आराजी संख्या 261, 262 व 268 का सम्मिलित खाता है। आरोप है कि इस भूमि पर दबंगई के बल पर अवैध कब्जा करने और जबरिया प्लाटिंग कराने का प्रयास किया जा रहा है।
पीड़ित के अनुसार अमित यादव, प्रदीप कठेरिया (निवासी भगवा नगला), रिजवान खान (निवासी ग्राम सोता बहादुरपुर) और पवन कटियार (निवासी राजीव गांधी नगर) समेत एक कथित पत्रकार इस साजिश में शामिल हैं। जब विवेक मिश्रा ने अपनी जमीन पर प्लाटिंग से साफ इंकार किया तो आरोपियों ने उसे एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी।
ऑडियो साक्ष्य होने का दावा
विवेक मिश्रा का कहना है कि धमकी से जुड़े ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद हैं, जो पूरे षड्यंत्र की पोल खोलते हैं। आरोप यह भी है कि संबंधित लोग बिना किसी लेआउट पास कराए लंबे समय से अवैध प्लाटिंग के धंधे में लिप्त हैं।
14 जनवरी को जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी से शिकायत की,जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सदर व थाना अध्यक्ष कादरी गेट को कार्रवाई के निर्देश दिए,इसके बावजूद 16 जनवरी को पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र पर भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप है कि थाना कादरी गेट पुलिस ने जिलाधिकारी के आदेशों को भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया।
नगर मजिस्ट्रेट से भी शिकायत
अवैध प्लाटिंग के मामले को लेकर विवेक मिश्रा ने नगर मजिस्ट्रेट संजय बंसल से भी शिकायत की है, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
अब मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार
लगातार अनदेखी से आहत पीड़ित युवक ने अब पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उसकी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कर लिया जाएगा और उसे झूठे मुकदमों में फंसाया जा सकता है।
सवाल है क्या गरीब व अनाथ व्यक्ति की जमीन सुरक्षित है?
क्या प्रशासनिक आदेशों की थाना स्तर पर कोई कीमत नहीं?
अवैध प्लाटिंग और भूमि माफिया के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
अब निगाहें शासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि पीड़ित को न्याय कब तक मिलेगा और कानून का राज कब कायम होगा।





