शाहजहांपुर। जलालाबाद कस्बे एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित विद्यालयों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। इन विद्यालयों में न तो मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व भविष्य को लेकर कोई गंभीरता दिखाई दे रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसे अवैध विद्यालयों पर कार्रवाई कब होगी।
प्रताप नगर, मंडी रोड के निकट संचालित सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल सहित कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां छोटे-छोटे मासूम छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। आरोप है कि इन विद्यालयों में न तो भवन की मानक व्यवस्था है, न ही बच्चों के बैठने की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
सूत्रों के अनुसार, जलालाबाद क्षेत्र में कई ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं जिनके पास न तो विभागीय मान्यता है और न ही आवश्यक दस्तावेज। हैरानी की बात यह है कि इन विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति भी बिना न्यूनतम शैक्षिक योग्यता के की जा रही है। कई जगहों पर बिना स्नातक डिग्री वाले शिक्षक सैकड़ों छात्र-छात्राओं को पढ़ा रहे हैं।
इतना ही नहीं, इन अवैध विद्यालयों द्वारा छात्रों का प्रवेश तो कर लिया जाता है, लेकिन परीक्षा परिणाम और अंकपत्र बिना किसी मान्यता के ही थमा दिए जाते हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन विद्यालयों को जिला बेसिक शिक्षा विभाग का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वे खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
गौरतलब है कि शाहजहांपुर के जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह द्वारा कुछ माह पूर्व अवैध रूप से संचालित विद्यालयों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया गया था। इस दौरान कई विद्यालयों का निरीक्षण कर उन पर लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि यह कार्रवाई केवल कुछ दिनों तक ही सीमित रही, जिससे शिक्षा माफियाओं में अस्थायी हड़कंप तो मचा, लेकिन बाद में उन्होंने राजनीतिक संरक्षण का सहारा लेकर फिर से अपनी गतिविधियां शुरू कर दीं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला स्तरीय अधिकारी एक बार फिर ऐसे अवैध विद्यालयों पर शिकंजा कसेंगे या फिर मासूम बच्चों का भविष्य यूं ही शिक्षा माफियाओं के हाथों गिरवी रहता रहेगा।


