चित्रकूट। तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक साक्षात्कार के बाद उठे विवाद और संत समाज में फैले असंतोष को शांत करने के लिए वीडियो जारी कर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनकी किसी भी संत, विशेषकर प्रेमानंद जी महाराज के प्रति कोई भी अभद्र टिप्पणी नहीं रही है और न ही वह कभी ऐसा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान को विधर्मी शक्तियां तोड़-मरोड़कर सनातन धर्म में भेद डालने का प्रयास कर रही हैं।जगद्गुरु ने कहा कि सनातन धर्म पर चारों ओर से आक्रमण हो रहे हैं और अब सभी हिंदुओं को पारस्परिक मतभेद भुलाकर एकजुट होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “हमने साढ़े पांच सौ वर्षों की लड़ाई जीतकर श्रीराम मंदिर पाया है। अब हमें कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ भी अवश्य मिलेगा।प्रेमानंद जी को लेकर उन्होंने दोहराया कि उनकी बात पुत्रवत और स्नेहपूर्ण रही है। उन्होंने कहा, “अब जब भी प्रेमानंद जी मुझसे मिलने आएंगे, मैं उन्हें हृदय से लगाऊंगा और उनके स्वास्थ्य के लिए श्रीरामचंद्र जी से प्रार्थना करूंगा।जगद्गुरु ने संस्कृत अध्ययन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हर हिंदू को संस्कृत पढ़नी चाहिए क्योंकि भारत की दो बड़ी पहचान संस्कृत और संस्कृति हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं प्रतिदिन 18 घंटे अध्ययन करते हैं और अपने शिष्यों से भी निरंतर पढ़ने-लिखने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी के खिलाफ कुछ नहीं कहते और सभी संत उनके लिए स्नेहभाजन हैं और रहेंगे।






