एशिया की बड़ी मंडियों में शुमार, फिर भी ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त
फर्रुखाबाद। सातनपुर आलू मंडी रोड पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम से आम जनमानस परेशान है। घंटों तक वाहन रेंगते रहते हैं, एंबुलेंस और स्कूल बसें तक जाम में फंस जाती हैं, लेकिन मौके पर प्रभावी पुलिस व्यवस्था नजर नहीं आती।
सातनपुर आलू मंडी को एशिया की बड़ी आलू मंडियों में गिना जाता है। यहां रोज सैकड़ों ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली और पिकअप वाहन माल लोडिंग-अनलोडिंग के लिए पहुंचते हैं। लेकिन यातायात प्रबंधन के अभाव में पूरी सड़क अराजक स्थिति में बदल जाती है।
जाम के प्रमुख कारण है मंडी गेट के बाहर अवैध पार्किंग सड़क किनारे खड़े भारी वाहन
लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान सड़क घेर लेना,ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती का अभाव है.
वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि जाम अब “रोजमर्रा की समस्या” बन चुका है। कई बार छोटे वाहन चालकों और ट्रक ड्राइवरों के बीच विवाद की स्थिति भी बन जाती है।
लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी मंडी होने के बावजूद ट्रैफिक कंट्रोल के लिए स्थायी योजना क्यों नहीं बनाई गई?
यदि यह मंडी एशिया की बड़ी मंडियों में गिनी जाती है, तो यहां अलग पार्किंग जोन,वन-वे ट्रैफिक सिस्टमस्थायी पुलिस चौकी,मंडी समय के अनुसार ट्रैफिक डायवर्जन जैसी व्यवस्थाएं क्यों नहीं लागू की जातीं?
मंडी क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित हो, मंडी के बाहर अस्थायी नहीं, स्थायी पार्किंग बनाई जाए,ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती सीसीटीवी निगरानी और चालान व्यवस्था,वैकल्पिक बाईपास मार्ग विकसित किया जाए।
सातनपुर आलू मंडी जहां प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रही है, वहीं स्थानीय नागरिकों के लिए परेशानी का कारण भी बन रही है।
यदि प्रशासन ठोस और दीर्घकालिक ट्रैफिक प्लान लागू करे, तो व्यापार और जनसुविधा दोनों संतुलित रह सकते हैं। फिलहाल सवाल यही है—आखिर रोज लगने वाले इस जाम से राहत कब मिलेगी?




