तेहरान
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही गहरे संकट में घिरती नजर आ रही है। पाकिस्तान में होने वाली इस अहम बातचीत पर अब लेबनान-इजरायल संघर्ष की काली छाया पड़ गई है। ईरान ने साफ तौर पर दो टूक कह दिया है कि जब तक लेबनान में हमले नहीं रुकते और विदेशों में जब्त उसकी संपत्तियां वापस नहीं की जातीं, तब तक वह वार्ता में शामिल नहीं होगा। इस सख्त रुख ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बकर गलीबाफ ने सार्वजनिक तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि युद्धविराम और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत के बिना बातचीत का कोई औचित्य नहीं है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका की तरफ से सख्त तेवर अपनाते हुए पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान के साथ कोई ठोस समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के प्रतिनिधि के तौर पर जेडी वेंस पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुके हैं, लेकिन ईरान की ओर से अब तक कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा है, जिससे वार्ता की संभावनाएं कमजोर होती जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि एक ओर बातचीत की कोशिशें हैं तो दूसरी ओर युद्ध की धमकियां भी तेज हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे तो मध्य पूर्व में तनाव और भड़क सकता है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस संभावित वार्ता और उससे जुड़ी हर गतिविधि पर टिकी हुई है।


