इटावा: प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री बृजेश पाठक ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े प्रकरण में दर्ज मुकदमे पर टिप्पणी करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन होता है, तब उस पर सार्वजनिक रूप से बयान देना न तो उचित है और न ही जिम्मेदारीपूर्ण आचरण माना जाता है। सरकार न्यायपालिका की गरिमा और विधिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करती है।
उपमुख्यमंत्री सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती पर चर्चा की गई। औपचारिक समारोह के उपरांत जब पत्रकारों ने उनसे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दर्ज मुकदमे को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने संयमित और संतुलित शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि न्यायालय सर्वोपरि है और कानून अपना कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा, “किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की स्वतंत्रता सर्वोच्च होती है। ऐसे मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सरकार की ओर से इस विषय पर कोई बयान देना उचित नहीं है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अदालत में लंबित मामलों पर चर्चा से बचना ही लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप है।
प्रदेश की राजनीति में इस प्रकरण को लेकर जारी बयानबाजी के संदर्भ में भी उपमुख्यमंत्री ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार का ध्यान विकास कार्यों, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित है। विवादित विषयों पर अनावश्यक टिप्पणी करना सरकार की प्राथमिकता नहीं है।
इसी दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई, जिसमें उन्होंने 100 विधायक लाकर मुख्यमंत्री बनाने की बात कही थी। इस पर बृजेश पाठक ने कहा कि इस तरह के सवालों का कोई विशेष अर्थ नहीं है और इसे उन्होंने राजनीतिक बयानबाजी करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वर्तमान सरकार को जनता का स्पष्ट जनादेश प्राप्त है और सरकार पूरी स्थिरता तथा प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दल अपनी-अपनी बात रखते हैं, लेकिन सरकार का दायित्व है कि वह जनहित के कार्यों पर ध्यान केंद्रित रखे। प्रदेश में कानून व्यवस्था, चिकित्सा शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। सैफई जैसे चिकित्सा संस्थानों का सुदृढ़ीकरण भी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
स्थापना दिवस कार्यक्रम के बाद हुई इस संक्षिप्त वार्ता में उपमुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा—न्यायालय में विचाराधीन विषयों पर सरकार कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेगी और न्यायिक प्रक्रिया का पूर्ण सम्मान किया जाएगा। उनका यह बयान प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच सरकार के आधिकारिक और संतुलित दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।


