कृषि निर्यात ठप, कारोबारियों को हजार करोड़ से अधिक का नुकसान
– मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने से भारतीय कृषि उत्पादों की सप्लाई प्रभावित, व्यापारियों में चिंता
नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। मध्य-पूर्व में हालात बिगड़ने के कारण भारतीय कृषि उत्पादों का निर्यात लगभग ठप हो गया है, जिससे कारोबारियों को एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
व्यापार से जुड़े संगठनों के अनुसार ईरान, इजरायल और आसपास के देशों में चावल, गेहूं, फल-सब्जियां, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों की बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है। लेकिन क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनने से जहाजों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक कई बंदरगाहों पर निर्यात के लिए तैयार माल अटका हुआ है। जहाजों की आवाजाही में देरी और सुरक्षा कारणों से शिपमेंट रोक दिए गए हैं। इससे व्यापारियों और निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किसानों और व्यापारियों की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो किसानों और निर्यातकों दोनों को बड़ा नुकसान हो सकता है। कई कृषि उत्पादों की मांग घटने और सप्लाई रुकने से बाजार में असंतुलन पैदा हो सकता है।
सरकार की नजर हालात पर
केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। निर्यातकों को उम्मीद है कि हालात सामान्य होने के बाद व्यापार फिर से पटरी पर लौट सकेगा, लेकिन फिलहाल युद्ध के कारण कृषि निर्यात पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है।
मध्य-पूर्व में जारी इस संघर्ष ने यह भी साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारतीय कृषि बाजार पर पड़ता है।
ईरान–इजरायल संघर्ष का असर भारत पर


