कानपुर। बहुचर्चित गैंगस्टर एक्ट मामले में पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी और उनके भाई रिजवान सोलंकी को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत के फैसले के बाद दो साल नौ माह बाद दोनों की जेल से रिहाई संभव हो सकेगी।
गौरतलब है कि इरफान और रिजवान ने 2 दिसंबर 2022 को पुलिस कमिश्नर के बंगले पर आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद से दोनों जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ दर्जनभर से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, हालांकि अधिकतर मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। अब गैंगस्टर एक्ट में राहत मिलने से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
जाजमऊ थाने में नजीर फातिमा का घर जलाए जाने की घटना के बाद इरफान, रिजवान और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी आधार पर सात लोगों—इरफान सोलंकी, रिजवान सोलंकी, मो. शरीफ, शौकत अली, इसराइल आटे वाला, मुर्सलीन खान उर्फ भोलू और मो. एजाज उर्फ अज्जन—के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की रिपोर्ट दर्ज की गई। इन पर मारपीट, आगजनी, धोखाधड़ी करके जमीन कब्जाना और रंगदारी वसूली जैसे गंभीर आरोप हैं।
हाल ही में 17 सितंबर को एमपीएमएलए सेशन कोर्ट में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि आरोपी मुकदमे को लंबित कराने की कोशिश कर रहे हैं और रिहा होने पर मुकदमे की प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे। हालांकि, हाईकोर्ट ने दोनों भाइयों की दलीलों को सुनते हुए जमानत मंजूर कर ली।
इरफान सोलंकी महाराजगंज जेल में बंद हैं, जबकि रिजवान सोलंकी और इसराइल आटे वाला कानपुर जेल में कैद हैं। अब जमानत आदेश जारी होने के बाद दोनों की रिहाई के आसार प्रबल हो गए हैं।




