तेहरान: ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के द्वीपों पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो फारस की खाड़ी हमलावरों के खून से लाल हो जाएगी।
कालिबफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी यह टिप्पणी किसी विशेष घटना के जवाब में दी गई है या नहीं, लेकिन इसे बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का संकेत माना जा रहा है।
ईरान के नियंत्रण में फारस की खाड़ी में तीन महत्वपूर्ण द्वीप हैं, जिन पर उसने 1971 में कब्जा किया था। ये द्वीप उस समय संयुक्त अरब अमीरात के गठन से पहले उसके अधिकार क्षेत्र में माने जाते थे। इन द्वीपों का सामरिक महत्व बहुत अधिक है और लंबे समय से इन्हें लेकर क्षेत्रीय विवाद भी रहा है।
इसी बीच यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के मुख्य तेल टर्मिनल खर्ग द्वीप को निशाना बना सकता है। खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, इसलिए इस पर किसी भी हमले का असर सीधे ईरानी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की सैन्य कार्रवाई होती है तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
दरअसल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कई वर्षों से बना हुआ है। खास तौर पर 2018 में जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग करने का फैसला किया था, तब से दोनों देशों के संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए।
हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव तो नहीं हुआ, लेकिन क्षेत्र में अप्रत्यक्ष संघर्ष और राजनीतिक टकराव लगातार जारी है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताएं भी बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कालिबफ का यह बयान ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसकी सख्त नीति को दर्शाता है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि यदि उसके रणनीतिक ठिकानों या द्वीपों को निशाना बनाया गया तो ईरान कड़ी प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हटेगा।


