तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब और ज्यादा खतरनाक रूप लेता जा रहा है। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते टकराव का सीधा असर अब खाड़ी देशों पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं।
संघर्ष के 19वें दिन सऊदी अरब ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उसने अब तक 438 ड्रोन और 36 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि हमले कितने बड़े पैमाने पर और लगातार किए जा रहे हैं।
सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन हफ्तों से उसकी हवाई सुरक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय है। देश के पूर्वी प्रांत, जहां बड़े तेल रिफाइनरी मौजूद हैं, सबसे ज्यादा निशाने पर रहे हैं।
इसके अलावा शैबाह तेल क्षेत्र और रियाद से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित अल-खारज के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर भी मिसाइल हमले किए गए हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। यहां अब तक 165 से अधिक मिसाइलें और 541 ड्रोन हमले दर्ज किए गए हैं, जो दर्शाता है कि यह संघर्ष सीमित नहीं रहा।
कुवैत पर भी 97 मिसाइल और 283 ड्रोन हमले किए गए हैं, जबकि कतर और बहरीन भी कई बार हमलों की चपेट में आ चुके हैं।
यहां तक कि ओमान भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा। ईरानी ड्रोन ने उसके दुक्म बंदरगाह को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।
हालांकि ईरान का दावा है कि उसका निशाना केवल अमेरिकी और इज़राइली सैन्य ठिकाने हैं, लेकिन खाड़ी देशों ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इन हमलों से नागरिक और आर्थिक ढांचे को भी नुकसान पहुंच रहा है।
इन हमलों के बाद कई खाड़ी देशों ने ईरान के राजदूतों को तलब कर कड़ा विरोध जताया है। इससे क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है।
बढ़ते खतरे को देखते हुए सऊदी अरब ने अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सामूहिक रणनीति तैयार करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह हमले जारी रहे, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। हवाई सुरक्षा प्रणालियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और युद्धविराम की संभावना फिलहाल दूर नजर आ रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों के आम लोगों की जिंदगी पर भी गहरा असर डाला है। लोग लगातार डर और अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों के बीच सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुका है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।


