नई दिल्ली| भारत ने इस महीने अपनी समुद्री सीमा में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरान से जुड़े तीन अमेरिकी प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त कर लिया। यह कदम अवैध तेल व्यापार और समुद्र के बीच जहाजों के जरिए गुप्त ट्रांसफर की गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन टैंकरों के जरिए तेल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने की कोशिश की जा रही थी।
सूत्रों के मुताबिक जब्त किए गए टैंकरों में स्टेलर रूबी, अस्फाल्ट स्टार और अल जफजिआ शामिल हैं। बताया गया है कि ये जहाज बार-बार अपना नाम, झंडा और पहचान बदलकर कानून से बचने की कोशिश करते थे। इन टैंकरों के मालिक विदेशों में स्थित हैं। हालांकि ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इन जहाजों का उसके साथ कोई संबंध नहीं है।
भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री क्षेत्रों में कड़ी निगरानी के तहत लगभग 55 जहाज और 10 से 12 विमान चौबीसों घंटे तैनात कर रखे हैं। पिछले महीने भी एक अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया गया था। जांच में सामने आया है कि ये टैंकर मध्य समुद्र में सस्ते तेल और तेल आधारित माल को अन्य जहाजों में ट्रांसफर कर अवैध तस्करी करते थे। पहचान छिपाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल बंद करना, नाम बदलना और दस्तावेजों में हेरफेर जैसी तरकीबें अपनाई जा रही थीं।
जांच एजेंसियों ने इलेक्ट्रॉनिक डेटा, जहाजों के दस्तावेज और चालक दल से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली उजागर की है। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन असेट्स कंट्रोल (OFAC) ने पिछले वर्ष ग्लोबल पीस, चिल 1 और ग्लोरी स्टार 1 नामक जहाजों पर प्रतिबंध लगाया था। इनके अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) नंबर मुंबई में जब्त जहाजों से मेल खाते पाए गए, जिससे प्रतिबंधों के उल्लंघन की आशंका और गहरा गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय तटरक्षक की यह कार्रवाई डिजिटल निगरानी और समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इससे न केवल अवैध तेल तस्करी पर अंकुश लगेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन और भारत-अमेरिका सहयोग को भी मजबूती मिलेगी। यह ऑपरेशन भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति को और प्रभावी बनाने का संकेत देता है।

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