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Monday, March 23, 2026

23 दिन की जंग में भी नहीं झुका ईरान

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अमेरिका फंसा, ट्रम्प तलाश रहे बाहर निकलने का रास्ता
यूथ इंडिया ब्यूरो | लखनऊ/नई दिल्ली।मध्य-पूर्व में जारी ईरान-अमेरिका तनाव अब 23 दिन की जंग का रूप ले चुका है, लेकिन हालात यह हैं कि न तो ईरान झुकने को तैयार है और न ही अमेरिका कोई निर्णायक बढ़त बना पाया है। युद्ध अब केवल सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि यह रणनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक दबाव की जटिल लड़ाई बन चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका इस संघर्ष में फंसता हुआ नजर आ रहा है, जबकि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब इस जंग से सम्मानजनक बाहर निकलने का रास्ता तलाशते दिखाई दे रहे हैं।
सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि उसका “धैर्य और दीर्घकालिक युद्ध मॉडल” है। ईरान सीधे युद्ध के बजाय असममित रणनीति अपनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों को लगातार थका रहा है। ड्रोन हमले, मिसाइल स्ट्राइक और समुद्री रास्तों पर दबाव बनाकर उसने युद्ध को लंबा खींच दिया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी पकड़ पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, क्योंकि यहां से गुजरने वाले तेल व्यापार पर असर पड़ते ही वैश्विक अर्थव्यवस्था हिलने लगती है।
जंग के 23 दिनों में दोनों पक्षों को नुकसान हुआ है, लेकिन तस्वीर एकतरफा नहीं है। अमेरिका और उसके सहयोगियों को सैन्य दबाव के साथ-साथ राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में लगातार तनाव, बढ़ती लागत और वैश्विक आलोचना ने अमेरिका की स्थिति को जटिल बना दिया है। वहीं ईरान को भी बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों पर हमलों का सामना करना पड़ा है, लेकिन उसकी आंतरिक पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन पर दबाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत सहित कई देशों में भी इसका असर निर्माण सामग्री और ऊर्जा कीमतों पर देखा जा रहा है।
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि अमेरिका की राजनीति में भी इस युद्ध को लेकर असहजता बढ़ रही है। डोनाल्ड ट्रम्प लगातार कड़े बयान दे रहे हैं और ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन साथ ही यह संकेत भी मिल रहे हैं कि अमेरिका अब इस युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहता। रणनीतिक रूप से अमेरिका “जीत का संदेश” देते हुए किसी समझौते या कूटनीतिक रास्ते की तलाश में है, ताकि बिना पूरी तरह पीछे हटे इस संघर्ष से बाहर निकला जा सके।

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