चंडीगढ़। हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या मामले में बड़ा कदम उठाया गया है। मृतक अधिकारी के सुसाइड नोट में नामित हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर, रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया समेत 14 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन सभी पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
एफआईआर में अधिकारियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं 3(5) व 3(1)(आर) के तहत मामला दर्ज हुआ है।
पूरन कुमार ने सुसाइड नोट में क्या लिखा था —
मृतक आईपीएस ने अपने सुसाइड नोट में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर वर्षों से चल रहे जाति-आधारित भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा कि यह अत्याचार तत्कालीन डीजीपी मनोज यादव के समय से शुरू हुआ था। पूरन कुमार के मुताबिक, 2020 में अंबाला के एक पुलिस मंदिर में जाने को लेकर उन्हें तिरस्कार झेलना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन एसीएस गृह राजीव अरोड़ा ने उनके गंभीर रूप से बीमार पिता से मिलने के लिए अर्जित अवकाश तक स्वीकृत नहीं किया, जिससे वे अंतिम बार पिता को नहीं देख सके। पूरन कुमार ने इसे “अत्याचार की शुरुआत” बताया।
अनिल विज की अध्यक्षता में हुई बैठक भी बेअसर
सुसाइड नोट में उल्लेख है कि पूरन कुमार ने अपने उत्पीड़न की शिकायतों को लेकर नवंबर 2023 में तत्कालीन गृह मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में हुई बैठक में मामले को रखा था। बैठक में एसीएस होम टीवीएसएन प्रसाद और डीजीपी शत्रुजीत कपूर भी मौजूद थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारियों पर लगाए गए अन्य गंभीर आरोप —
पूरन कुमार ने आरोप लगाया कि 1996 बैच के आईपीएस डॉ. एम रवि किरण ने उनका सार्वजनिक मजाक उड़ाया।
1995 बैच के संदीप खिरवार और शिबास कविराज पर झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश का आरोप लगाया।
आईजी कुलविंद्र सिंह पर फोन पर धमकाने का आरोप है।
वहीं, आईजी पंकज नैन और अमिताभ ढिल्लों पर गुमनाम शिकायतें तैयार करने और साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया।
वसीयत में पत्नी के नाम की सारी संपत्ति
आत्महत्या से एक दिन पहले, 6 अक्टूबर को आईपीएस पूरन कुमार ने अपनी आईएएस पत्नी अमनीत पी. कुमार के नाम पर वसीयत बनाई। इसमें चंडीगढ़ सेक्टर 11 की कोठी में 25 प्रतिशत हिस्सा, मोहाली में प्लॉट, गुरुग्राम स्थित ऑफिस और बैंक खातों की डिटेल शामिल है।
पूरन कुमार ने अपने आखिरी शब्दों में लिखा —
> “मैं इस भेदभाव, सार्वजनिक अपमान, लक्षित मानसिक उत्पीड़न और अत्याचारों को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
इस सनसनीखेज सुसाइड नोट के सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच विशेष टीम (SIT) को सौंपी जा सकती है।






