आईजीआरएस शिकायत के जवाब में सच्चाई आई सामने, विभाग बोला – एक रुपया भी जमा नहीं
फर्रुखाबाद: NH-730C पर स्ट्रीट लाइट (Street lights) लगाने के दावों की हकीकत अब सवालों के घेरे में है। IGRS पोर्टल के माध्यम से की गई शिकायत के जवाब में संबंधित विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाइटिंग कार्य के लिए अब तक परियोजना मद में कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पंचाल घाट से बदर मार्ग तक हाईवे पर प्रकाश व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय लोगों का आरोप था कि कागज़ों में लाइटिंग कार्य का उल्लेख किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम दिखाई नहीं दे रहा।
शिकायतकर्ता द्वारा आईजीआरएस के माध्यम से जवाब तलब किए जाने पर संबंधित एजेंसी ने लिखित रूप से अवगत कराया कि लाइटिंग कार्य के लिए धनराशि जमा न होने के कारण काम शुरू नहीं किया जा सका। वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों ने भी अपने स्तर से स्पष्ट किया कि संबंधित मद में किसी प्रकार की धनराशि उनके खाते में प्राप्त नहीं हुई है।
दस्तावेजों में परियोजना प्रबंधन की ओर से लाइटिंग से संबंधित पत्राचार का दावा किया गया, लेकिन मौके पर कार्य प्रारंभ होने के प्रमाण नहीं मिले। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि शासन स्तर से हाईवे पर प्रकाश व्यवस्था के निर्देश दिए गए थे तो धनराशि आखिर किस स्तर पर अटकी? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पंचाल घाट से बदर तक का मार्ग धार्मिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रात के समय अंधेरा रहने से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
मामला सामने आने के बाद अब यह मांग उठ रही है कि संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाए। सवाल यह भी है कि क्या बिना बजट स्वीकृति के ही कागज़ी कार्यवाही आगे बढ़ा दी गई? या फिर स्वीकृति के बाद भुगतान प्रक्रिया में लापरवाही हुई? जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या कदम उठाता है और एनएच-730सी पर लाइटिंग व्यवस्था कब तक धरातल पर उतरती


