2007–2011 के बीच बने भव्य स्मारकों में पत्थर खरीद घोटाले पर शिकंजा
LDA–UPRN के 57 अफसरों पर गिर सकती है गाज
लखनऊ: राजधानी लखनऊ (Lucknow) में सामने आए 1400 करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले की जांच एक बार फिर तेज कर दी गई है। वर्ष 2014 में दर्ज विजिलेंस एफआईआर के आधार पर अब इस बहुचर्चित घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच के दायरे में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और UPRN के तत्कालीन अफसर शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच में अधीक्षण अभियंता, चीफ इंजीनियर समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर इन अफसरों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। माना जा रहा है कि LDA और UPRN के करीब 57 अधिकारी इस मामले में फंस सकते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विजय विश्वास पंत, कमिश्नर लखनऊ ने संबंधित विभागों से 2007 से 2011 के बीच के सभी अहम दस्तावेज तलब किए हैं। इन दस्तावेजों में स्मारकों के निर्माण, टेंडर प्रक्रिया, भुगतान विवरण और विशेष रूप से पत्थर की खरीद से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। जांच का फोकस लखनऊ और नोएडा में बने भव्य स्मारकों पर है, जहां निर्माण कार्यों में पत्थर की खरीद और आपूर्ति के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप हैं। आरोप है कि बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर पत्थर खरीदे गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
विजिलेंस की FIR बनी आधार
वर्ष 2014 में दर्ज विजिलेंस एफआईआर को आधार बनाकर अब जांच एजेंसियां एक-एक फाइल खंगाल रही हैं। टेंडर शर्तों, सप्लायरों, भुगतान स्वीकृति और इंजीनियरिंग प्रमाणन की क्रॉस-वेरिफिकेशन की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घोटाले की साजिश किस स्तर तक फैली थी। प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है। संकेत हैं कि जांच पूरी होते ही दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार की मंशा स्पष्ट है—सरकारी धन के दुरुपयोग पर जीरो टॉलरेंस।


