मैनपुरी: औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने प्रस्तावित ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत करीब एक हजार हेक्टेयर भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इस पहल से क्षेत्र में निवेश बढ़ने, रोजगार सृजन होने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यूपीडा द्वारा प्रदेश में बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए नए ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण प्रस्तावित है। यह एक्सप्रेसवे इटावा के कुदरैल से हरदोई के कौसिया तक बनाया जाएगा, जिसमें मैनपुरी जनपद के लगभग 30 किलोमीटर क्षेत्र में सिक्सलेन सड़क का निर्माण शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के बीच यातायात को सुगम बनाना तथा औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना के तहत एक्सप्रेसवे के आसपास ऐसे भूखंडों की पहचान की जा रही है, जहां बड़े, मध्यम और लघु उद्योग स्थापित किए जा सकें। खासतौर पर स्थानीय उत्पादों—कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों—को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। इससे मैनपुरी और आसपास के जनपदों के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। इसके बाद मास्टर प्लान तैयार कर औद्योगिक भूखंडों का विकास, आंतरिक सड़कें, बिजली, पानी और अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं भी लागू की जा सकती हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि एक्सप्रेसवे आधारित औद्योगिक विकास मॉडल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी सफल रहा है। मैनपुरी में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है। स्थानीय व्यापारियों और किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा, क्योंकि उनकी उपज और उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
यदि योजना तय समयसीमा में पूरी होती है, तो मैनपुरी आने वाले वर्षों में औद्योगिक मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है। यह परियोजना न केवल आधारभूत संरचना को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्रीय संतुलित विकास की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।


