25.2 C
Lucknow
Monday, March 16, 2026

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारतीय नौसेना की तैनाती, तेल-गैस लेकर आ रहे जहाजों को दे रही सुरक्षा

Must read

नई दिल्ली: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए भारतीय नौसेना ने पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। नौसेना ने दो विशेष टास्क फोर्स यानी युद्धपोतों के समूह तैनात किए हैं, जो भारत की ओर आने वाले व्यापारिक जहाजों और तेल-गैस लेकर आने वाले टैंकरों को सुरक्षित रास्ता दिलाने का काम कर रहे हैं। इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखना है।

सूत्रों के मुताबिक भारत आने वाले अधिकतर तेल और गैस के जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे दुनिया के सबसे रणनीतिक और व्यस्त समुद्री रास्तों में गिना जाता है। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव या हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।

हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर पैदा हुई चिंताओं के बीच भारत ने यह कदम उठाया है। भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन व्यापारिक जहाजों को एस्कॉर्ट कर रहे हैं, यानी उनके साथ चलते हुए सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारत की ओर आने वाले तेल और गैस के टैंकर सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।

नौसेना के अधिकारी लगातार इस समुद्री मार्ग की निगरानी कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर भारतीय युद्धपोत जहाजों को तकनीकी सहायता, संचार समर्थन और आपातकालीन सुरक्षा भी उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा समुद्री क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के लिए उन्नत रडार प्रणाली, हेलीकॉप्टर और अन्य आधुनिक उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भारत के लिए बेहद अहम है। इसी कारण भारतीय नौसेना लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय निगरानी बनाए हुए है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके और देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।

विशेषज्ञों के अनुसार यह तैनाती केवल जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री रणनीति और वैश्विक व्यापारिक हितों की रक्षा का भी हिस्सा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि भारत अपने व्यापारिक और ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए समुद्री क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article