नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की नीतियों, सुधारों और योजनाओं ने देश के विनिर्माण क्षेत्र को नई दिशा दी है, जिसका असर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है।
भारत सरकार की प्रमुख पहल ‘मेक इन इंडिया’ ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। इसके साथ ही उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना ने इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, फार्मा, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश का रास्ता खोला है। इन योजनाओं के तहत कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने पर सीधे आर्थिक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत कम और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ी है।
भारत में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, बंदरगाह और एयरपोर्ट जैसी आधारभूत संरचनाओं ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई मजबूती दी है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी परियोजनाएं उद्योगों के लिए गेमचेंजर साबित हो रही हैं। इससे माल की ढुलाई तेज, सस्ती और अधिक कुशल हुई है।
वैश्विक स्तर पर ‘चीन प्लस वन’ रणनीति के चलते भी भारत को बड़ा फायदा मिला है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब अपने उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा भारत में स्थापित कर रही हैं, जिससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। विशेष रूप से मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है और अब वह दुनिया के प्रमुख उत्पादन केंद्रों में शामिल हो चुका है।
सरकार द्वारा श्रम कानूनों में सुधार, कर व्यवस्था को सरल बनाना और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रक्रियाओं को आसान बनाना भी उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार के चलते निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और स्टार्टअप व एमएसएमई सेक्टर को भी नई गति मिली है।
रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता कम हो रही है और निर्यात के नए अवसर खुल रहे हैं। इसके अलावा ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से सुधार और निवेश जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल एशिया बल्कि दुनिया के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। इससे देश की जीडीपी में वृद्धि के साथ-साथ करोड़ों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।
भारत बना ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब


