विपक्ष बोला- ट्रंप की जीत, मोदी की हार
नई दिल्ली| भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा सामने आते ही देश की राजनीति और कारोबारी जगत में भूचाल आ गया है। सरकार जहां इसे निर्यात, निवेश और रोजगार बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे अमेरिका के सामने झुकने वाला करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। संयुक्त बयान जारी होने के बाद यह समझौता सीधे सियासी बहस के केंद्र में आ गया है।
इस अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ में बड़ी कटौती की है, जिससे निर्यात, एमएसएमई सेक्टर और रोजगार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी लाल रेखा खींचते हुए सुरक्षा बरकरार रखने का दावा किया है। सरकार का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, जबकि विपक्ष इसे भारत के हितों के खिलाफ बता रहा है।
कुल मिलाकर भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता आर्थिक फायदे और सियासी टकराव का नया अखाड़ा बन गया है। सरकार इसे भारत के लिए सुनहरा मौका बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करार दे रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम समझौते में भारत को कितना फायदा और कितना सियासी नुकसान झेलना पड़ेगा।
निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के खुलेंगे रास्ते : राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय निर्यात को नया बाजार मिलेगा, मजदूर-आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राजनाथ सिंह ने साफ किया कि किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता भारत की आर्थिक यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा और देश को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाएगा।
कांग्रेस का तीखा हमला- नमस्ते ट्रंप जीते, हाउडी मोदी हारे
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस समझौते को अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “नमस्ते ट्रंप जीते, हाउडी मोदी हारे।” रमेश ने दावा किया कि इस समझौते से भारत का व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अब रूस से तेल खरीदेगा तो उस पर 25 फीसदी टैरिफ का खतरा होगा, अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटेगा, अमेरिका से आयात कई गुना बढ़ेगा और आईटी व सेवा क्षेत्र को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। कांग्रेस का कहना है कि असली सच्चाई तब सामने आएगी, जब समझौते के पूरे ब्योरे सार्वजनिक होंगे।






