बांदा। जिले में आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई के बाद कई कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्रेनाइट खनन, मेडिकल और रियल एस्टेट से जुड़े करीब 18 से 20 कारोबारियों और ठेकेदारों के ठिकानों पर की गई छापेमारी में भारी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि इन कारोबारियों का कुल नामी-बेनामी कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक का है।
कानपुर आयकर विभाग की टीमों ने पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। यह कार्रवाई जीडी ग्रुप के संचालक दिलीप सिंह, शिवशरण सिंह, सीरजध्वज सिंह और अन्य कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर की गई। पांच दिनों तक चली जांच के बाद विभाग ने कई अहम दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन से जुड़े प्रमाण जुटाए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कारोबारी अपने वास्तविक कारोबार को छिपाकर बहुत कम आय दिखा रहे थे। बताया गया कि लगभग 400 करोड़ रुपये का कारोबार अलग-अलग नामों से संचालित किया जा रहा था, जबकि आयकर में मात्र एक करोड़ रुपये के आसपास के कारोबार का विवरण दिया जा रहा था।
जांच के दौरान आयकर विभाग को करोड़ों रुपये के सोने के गहने, हीरे की अंगूठियां, महंगी गाड़ियां और कई बैंक खातों की जानकारी मिली। विभाग ने इन सभी संपत्तियों को सीज कर दिया है। साथ ही कई शहरों में रिश्तेदारों और परिजनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार जांच में सालाना 10 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी सामने आई है। माना जा रहा है कि यह अनियमितता लंबे समय से जारी थी। जांच पूरी होने के बाद विभाग इन कारोबारियों से बकाया कर के साथ भारी जुर्माना भी वसूलेगा।
जांच के दौरान कुछ कारोबारियों की आर्थिक तरक्की को लेकर भी चर्चा रही। बताया गया कि इनमें से एक कारोबारी ने वर्षों पहले फोटो कॉपी की छोटी दुकान से काम शुरू किया था और कुछ ही दशकों में करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन गए। वहीं एक अन्य कारोबारी के बारे में कहा जा रहा है कि खनन कारोबार में सक्रिय होने के बाद उसकी संपत्ति तेजी से बढ़ी। अब आयकर विभाग बरामद दस्तावेजों की गहन जांच कर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।


