29 C
Lucknow
Monday, March 30, 2026

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और यूरोपीय संसद प्रतिनिधिमंडल की अहम बैठक, भारत-ईयू संबंधों को नई दिशा

Must read

नई दिल्ली। ओम बिरला ने संसद भवन में एंजेलिका नीब्लर के नेतृत्व में आए यूरोपीय संसद के भारत संबंधी प्रतिनिधिमंडल (डी-इन) से विस्तृत बैठक कर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
बैठक के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने खुशी जताई कि यूरोपीय संघ के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ संसदीय मैत्री समूह की पहली बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उन्होंने इसे दोनों लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के बीच विश्वास और संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
रणनीतिक साझेदारी पर गहन चर्चा
मुलाकात में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी सहयोग, शिक्षा और वैश्विक शांति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने माना कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत-ईयू साझेदारी न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संसदीय आदान-प्रदान को बताया सहयोग का स्तंभ
ओम बिरला ने कहा कि संसदीय आदान-प्रदान किसी भी लोकतंत्र की मजबूती का आधार होता है। सांसदों के बीच संवाद से नीतिगत समझ विकसित होती है और दोनों क्षेत्रों की जनता के हितों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संवाद लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देते हैं।
लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा दृष्टिकोण पर सहमति
बैठक में दोनों पक्षों ने लोकतंत्र, कानून के शासन, मानवाधिकारों और बहुपक्षवाद जैसे साझा मूल्यों की अहमियत को दोहराया। इस बात पर सहमति बनी कि इन मूल्यों के आधार पर वैश्विक चुनौतियों—जैसे जलवायु संकट, सुरक्षा और आर्थिक अस्थिरता—का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है।
जन-से-जन संपर्क बढ़ाने पर जोर
प्रतिनिधिमंडल और भारतीय पक्ष के बीच इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत किया जाए। शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, युवा कार्यक्रमों और पर्यटन के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को करीब लाने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई गई।
भविष्य के सहयोग का रोडमैप
बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि संसदीय सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाएगा और नियमित संवाद के माध्यम से दोनों पक्ष अपने संबंधों को और प्रगाढ़ करेंगे। साथ ही, वैश्विक मंचों पर साझा हितों के मुद्दों पर मिलकर काम करने की भी प्रतिबद्धता दोहराई गई।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article