अमृतपुर (फर्रुखाबाद): थाना अमृतपुर (Amritpur) क्षेत्र में अंधाधुंध अवैध बालू खनन (Illegal mining) अब खुलकर जानलेवा रूप ले चुका है। हाल ही में एक तेज रफ्तार डम्पर द्वारा युवक को कुचलकर मौत के घाट उतार देने की घटना ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। यह कोई पहली घटना नहीं है—इससे पहले भी कई जानें जा चुकी हैं, लेकिन न तो अवैध खनन रुका और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा अवैध खनन तंत्र एक प्रदेश-स्तरीय नेता के संरक्षण में फल-फूल रहा है। इसी संरक्षण की बदौलत दिन-रात सैकड़ों डम्पर गांवों की सड़कों से फर्राटा भरते हैं, न सुरक्षा मानक हैं, न गति नियंत्रण और न ही प्रशासनिक भय।
डम्पर बना मौत का हथियार
ग्रामीणों के मुताबिक, जिस डम्पर ने युवक की जान ली, वह पहले भी तेज रफ्तार और लापरवाही के लिए कुख्यात था। अवैध खनन से लदे डम्पर गांवों के बीच से गुजरते हैं, जहां बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हमेशा खतरे में रहते हैं। सवाल यह है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है, तो पुलिस और प्रशासन आखिर देख क्या रहा है?
पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप
क्षेत्र में चर्चा आम है कि अवैध खनन की जानकारी होने के बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस और जिला प्रशासन आंखें मूंदे हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने पर या तो कोई सुनवाई नहीं होती, या फिर उल्टे पीड़ितों को ही डराया-धमकाया जाता है। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक निष्क्रियता और संभावित मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार हो रही मौतों और अवैध खनन से क्षेत्र के ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पनप रहा है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो जनाक्रोश कभी भी फूट सकता है। गांव-गांव में यह चर्चा है कि “मौत के डम्पर” कब किसे कुचल दें, कोई भरोसा नहीं। प्रदेश में कानून-व्यवस्था और “जीरो टॉलरेंस” की बात करने वाली सरकार के दावों पर अमृतपुर की स्थिति सवालिया निशान लगा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन और उससे जुड़ी मौतों ने योगी आदित्यनाथ के सुशासन की छवि पर खुलेआम कालिख पोत दी है।सवाल जो जवाब मांगते हैं
अवैध खनन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मौत के जिम्मेदार डम्पर मालिक और संरक्षक कौन हैं?
पुलिस और खनन विभाग की भूमिका क्या है?
आखिर कितनी और जानें जाएंगी, तब जाकर प्रशासन जागेगा?
अमृतपुर की यह तस्वीर बताती है कि अवैध खनन अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानव जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है। यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह आक्रोश किसी बड़े विस्फोट का कारण बन सकता है।


