स्टाफ नर्स निधि पर अवैध वसूली का आरोप, प्रसुताओं की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़
फर्रुखाबाद। प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath द्वारा सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और स्टाफ नर्स इन योजनाओं को नजरअंदाज करते हुए मरीजों से अवैध वसूली करने के आरोपों में घिरते नजर आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शहर के लिंजीगंज स्थित सिविल अस्पताल से सामने आया है, जहां प्रसूता को भर्ती करने के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगाया गया है।
जानकारी के अनुसार लिंजीगंज स्थित सिविल अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स निधि पर प्रसूताओं को भर्ती करने के लिए 2000 रुपये लेने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि बिना पैसे लिए प्रसूता को भर्ती नहीं किया जाता और उन्हें रेफर करने की बात कहकर परिजनों पर दबाव बनाया जाता है। इससे मरीजों के परिजन मजबूर होकर पैसे देने को तैयार हो जाते हैं ताकि उनके मरीज का सही तरीके से इलाज हो सके।
बताया गया कि मंगलवार की रात शहर के एक मोहल्ले की गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा होने पर अपने परिजनों के साथ सिविल अस्पताल लिंजीगंज पहुंची। वहां मौजूद स्टाफ नर्स निधि ने प्रसूता को भर्ती करने से पहले 2000 रुपये जमा करने की बात कही। जब प्रसूता के पति ने पैसे देने में असमर्थता जताई तो नर्स ने मरीज को अन्य अस्पताल में रेफर करने की बात कह दी। प्रसूता की हालत को देखते हुए परिजन घबरा गए और आखिरकार पैसे देने के लिए तैयार हो गए।
परिजनों के पैसे देने की सहमति के बाद ही प्रसूता को अस्पताल में भर्ती किया गया। कुछ ही समय बाद महिला ने एक नवजात शिशु को जन्म दिया। परिजनों का कहना है कि यदि उस समय प्रसूता को भर्ती नहीं किया जाता तो अस्पताल परिसर में ही प्रसव की स्थिति बन सकती थी और महिला की जान को भी खतरा हो सकता था।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रसव होने के बाद भी परिजनों से 2000 रुपये की रकम ले ली गई। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस प्रकार की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों का शोषण जारी रहेगा।
फिलहाल इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं क्षेत्र के लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बिना किसी दबाव और अवैध वसूली के बेहतर उपचार मिल सके।


