फर्रुखाबाद: राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान (National Deworming Campaign) शुरू होने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग (health department) की तैयारियाँ सवालों के घेरे में आ गई हैं। कमालगंज क्षेत्र के राठौरा मोहद्दीनपुर में दवा खिलाए जाने के बाद सैकड़ों बच्चे अचानक बीमार पड़ गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्वास्थ्य प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर हो गई।
जवाहरलाल प्रेमा देवी जूनियर हाई स्कूल राठौरा मोहद्दीनपुर में दवा दिए जाने के कुछ ही समय बाद करीब डेढ़ सौ बच्चों को उल्टी, चक्कर, तेज पेट दर्द और बेहोशी की शिकायत होने लगी। बच्चों की तबीयत बिगड़ते ही स्कूल परिसरों में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही घबराए परिजन बड़ी संख्या में स्कूल पहुंच गए।
सीएमओ मौके पर, कई बच्चे रेफर
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार स्वयं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमालगंज पहुंचे और बीमार बच्चों का हाल जाना। हालत गंभीर होने पर कुछ बच्चों को लोहिया अस्पताल रेफर किया गया, जबकि अन्य को सीएचसी मोहम्मदाबाद भेजा गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
गौरतलब है कि जिले में 10 फरवरी को कृमि मुक्ति अभियान के तहत 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 9,07,820 बच्चों और किशोरों को पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाने का लक्ष्य तय किया गया था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, पंचायती राज समेत 11 विभागों को जोड़ा गया था। एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण दिए जाने के दावे भी किए गए थे। अभियान के दूसरे चरण (13 से 15 फरवरी) में छूटे बच्चों को दवा देने की योजना थी।
अभियान शुरू होने से पहले ही हुई इस घटना ने सरकारी दावों की हकीकत सामने ला दी है। अब सवाल उठ रहे हैं
क्या दवा की गुणवत्ता संदिग्ध थी?
क्या खुराक (डोज़) तय मानकों के अनुसार नहीं दी गई?क्या बच्चों को खाली पेट दवा दे दी गई?
घटना के बाद क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है। परिजन बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इलाज न मिलता तो बड़ा हादसा हो सकता था।


