19 C
Lucknow
Monday, February 9, 2026

कमाई कितनों की हो रही है? कंटेंट क्रिएटर इकोनॉमी की हकीकत

Must read

नई दिल्ली: सोशल मीडिया (social media) पर वायरल रील, लाखों फॉलोअर्स और लग्ज़री लाइफस्टाइल देखकर युवाओं का बड़ा वर्ग कंटेंट क्रिएटर (content creator) बनने का सपना देख रहा है। लेकिन सवाल यह है कि असल में कमाई कितने लोगों की हो रही है? ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि कंटेंट क्रिएटर इकोनॉमी जितनी चमकदार दिखती है, उसकी जमीनी हकीकत उतनी ही कड़वी है।

करोड़ों जुड़े, कमाने वाले गिने-चुने

भारत में अनुमान के मुताबिक 8 से 10 करोड़ लोग अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट क्रिएशन से जुड़े हैं। इनमें वीडियो, रील, ब्लॉग और लाइव स्ट्रीमिंग करने वाले शामिल हैं। लेकिन इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार
सिर्फ 8–10 प्रतिशत क्रिएटर ही नियमित कमाई कर पा रहे हैं
1 प्रतिशत से भी कम ऐसे हैं जिनकी आय इतनी है कि वे पूरी तरह इसी पर निर्भर रह सकें
90 प्रतिशत से अधिक क्रिएटर या तो बिल्कुल नहीं कमा पा रहे या बेहद मामूली आय पर टिके हैं।
उपलब्ध डेटा के मुताबिक
करीब 65% क्रिएटर की मासिक कमाई ₹5,000 से कम,
लगभग 25% क्रिएटर ₹5,000 से ₹20,000 के बीच है।
8–9% क्रिएटर ₹20,000 से ₹1 लाख तक जबकि 1% से भी कम क्रिएटर ऐसे हैं जिनकी कमाई ₹1 लाख प्रति माह से अधिक है।
यानी सोशल मीडिया पर दिखने वाली महंगी गाड़ियां, विदेश यात्राएं और ब्रांडेड लाइफस्टाइल केवल टॉप 1% की तस्वीर है।

कंटेंट क्रिएटर की कमाई का बड़ा जरिया मानी जाने वाली ब्रांड डील भी हर किसी को नसीब नहीं होती

10 हजार से कम फॉलोअर्स वालों को ज्यादातर ब्रांड्स नजरअंदाज करते हैं।
वीडियो प्लेटफॉर्म पर ऐड रेवेन्यू पाने के लिए कड़े मानक तय हैं, जबकि रील और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर सीधी कमाई के विकल्प सीमित हैं। नतीजा यह कि अधिकांश क्रिएटर मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन आमदनी नहीं के बराबर है।
डिजिटल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कंटेंट क्रिएशन को पूरक आय के तौर पर देखना ज्यादा सुरक्षित है। बिना योजना, स्किल और लंबे धैर्य के इसे फुल-टाइम करियर मानना कई बार आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
कंटेंट क्रिएटर इकोनॉमी का सच साफ है नाम करोड़ों का, कमाई चंद लोगों की।चमक-दमक के पीछे छिपी यह हकीकत युवाओं के लिए सीख भी है और चेतावनी भी।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article