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Wednesday, April 8, 2026

कैसे हो दिल खोल गुण्डों पर कड़ी कार्यवाही, जब गुरू परंपरा ने बांध दिए हांथ?

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=माफिया-महंत-प्रशासन गठजोड़ की तस्वीरों ने खड़े कर दिए सवाल
=माफिया के स्वजनों और बड़े साहब दोनों के गुरू एक

यूथ इंडिया संवाददाता

फर्रुखाबाद। जनपद में सबसे बड़े श्री हनुमान ट्रस्ट स्थित थाना मऊदरवाजा की बेशकीमती जमीन को कब्जा करने के बाद बड़े भू माफिया के रूप में शासन प्रशासन में साबित हुए डा० अनुपम दुबे और उसके परिवार के तार जिले के तमाम धार्मिक संस्थानों से जुड़े छिपे नही रहे, ऐसे में प्रशासनिक तंत्र के बीच धर्माचार्यो के कथित गठजोड़ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस महाअभियान पर भी बट््टा लगने लगा है।

माफिया अनुपम दुबे की पत्नी मीनाक्षी दुबे का सम्बंध भोलेपुर स्थित श्री हनुमान मंदिर के महंत मोहनदास से कोई छिपे नही हैं। मोहनदास स्व० महन्त बालकदास के कथित चेले है और इनका भी ककियूली थाना नवाबगंज स्थित रामताल मंदिर की बेशकीमती कई बीघा जमीन और ट्रस्ट का आपसी संतों का विवाद छिपा नही है।

मोहनदास उस जमीन को अपने कब्जे में लेने के लिए प्रशासन और कोर्ट कचहरी के न केवल चक्कर लगा रहे बल्कि दूसरे संत मनमोहनदास के बीच उनकी तलवारें भी लंबे समय से खिंची है। यही मोहनदास जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी के भी बेहद करीबी ही नही गुरू भी बताये जाते है। अब तक इनकी मदद पुलिस के जरिए अंदरखाने भोलेपुर निवासी और डा० अनुपम दुबे का बेहद करीबी गुर्गा अवधेश मिश्रा और एक अन्य चर्चित नाम करते रहे।

ककियूली स्थित रामताल मंदिर पर मोहनदास का वर्षो से अवैध कब्जा है। इस कब्जे को क्या अब प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त हो गया? यदि यह आरोप सही है तो यह केवल एक मंदिर या व्यक्ति का मामला नही, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप लगाता है।

लोगों का कहना है कि जब माफिया और अपराधी तंत्र से जुडे लोग धार्मिक और प्रशासनिक संरक्षण में फलने फूलने लगे तो कठोर कार्यवाही की उम्मीद कैसे की जा सकती है। यही बजह है कि कई मामलों में कार्यवाही अधूरी या पक्षपात पूर्ण नजर आती है। सबाल उठ रहा है कि क्या कानून का डंडा सिर्फ आम लोगों के लिए है, जबकि प्रभावशाली लोग सिस्टम में अपनी पकड़ बाबा और संतों के जरिए बना रहे है।

हांलाकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नही हुई है। लेकिन तस्वीरों और स्थानीय दावों ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बनाया है। अब जरूरत है कि माफिया-महंत और प्रशासन गठजोड़ की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच हो ताकि सच्चाई सामने आये और यदि कोई दोषी हो तो उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही हो।

जनपद में इस मुद््दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग यह जानना चाहते है कि जीरो टॉलरेंस क्या केवल नारे तक सीमित है या वास्तव में प्रभावशाली लोगों पर भी समान रूप से लागू होगा। यहां यह भी बताना जरूरी है कि महंत मोहनदास की पैरवी के कारण शासन प्रशासन की छवि खराब करने वाले माफिया अनुपम दुबे गैंग के हैण्लर नॉन प्रक्टीशनर वकील अवधेश मिश्रा पर भी डीएम स्तर से कार्यवाही नही हुई।

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