काबुल: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अस्पताल पर हुए कथित हवाई हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। यूरोपीय संघ (EU) ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया है।
यह हमला 16 मार्च की रात को हुआ बताया जा रहा है, जब काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित एक बड़े चिकित्सा केंद्र को निशाना बनाया गया। अफगान पक्ष का दावा है कि यह हमला पाकिस्तान की ओर से किया गया था।
यूरोपीय संघ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों और चिकित्सा सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे संस्थान जेनेवा कन्वेंशन के तहत संरक्षित होते हैं और उन पर हमला गंभीर अपराध माना जाता है।
EU ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर तत्काल युद्धविराम और बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया है।
अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्ताकी ने इस हमले को “जानबूझकर किया गया” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने सैन्य विमानों और ड्रोन के जरिए अस्पताल को निशाना बनाया।
मुत्ताकी के अनुसार, इस हमले में नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती 408 से अधिक मरीजों की मौत हो गई, जबकि 265 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
अफगान पक्ष का यह भी कहना है कि हमले का समय बेहद संवेदनशील था, क्योंकि यह रमजान के अंतिम दिनों और ईद-उल-फितर से ठीक पहले हुआ। इस कारण इस घटना ने लोगों में और अधिक आक्रोश पैदा किया है।
मुत्ताकी ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया, बल्कि इस्लामी युद्ध सिद्धांतों की भी अनदेखी की है। उन्होंने इसे अफगान समाज के कमजोर वर्गों पर सीधा हमला बताया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफगान सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की है, लेकिन केवल उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है जहां से हमले किए गए थे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे संघर्ष में यह घटना एक खतरनाक मोड़ मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों और संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताई है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए, तो यह संघर्ष और गहरा सकता है।
फिलहाल, इस हमले की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठ रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदारी किसकी है।
यह घटना एक बार फिर युद्ध के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है और बताती है कि संघर्ष की आग में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को ही उठाना पड़ता है।


