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Wednesday, February 25, 2026

होली का उत्सव और आंखों की सुरक्षा: सावधानी ही सबसे बड़ा रंग

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— संदीप सक्सेना

होली (Holi) भारतीय संस्कृति का ऐसा उल्लासमय पर्व है, जो जीवन में रंग, उमंग और आपसी सौहार्द का संचार करता है। यह त्योहार (Festival) मन की दूरियों को मिटाकर रिश्तों में अपनत्व की नई आभा भर देता है। किंतु आधुनिक परिवेश में जहां उत्सव का विस्तार हुआ है, वहीं असावधानी और रासायनिक रंगों के बढ़ते प्रयोग ने स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ा दिए हैं। विशेषकर आंखों के लिए यह समय अत्यंत संवेदनशील हो जाता है।

आंखें केवल देखने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे जीवन की रोशनी हैं। इन्हीं के सहारे हम संसार के विविध रंगों का आनंद लेते हैं। ऐसे में विडंबना यह है कि रंगों के इसी पर्व पर आंखों को सबसे अधिक खतरा रहता है। मोतियाबिंद से ग्रसित मरीजों और जिनका हाल ही में ऑपरेशन हुआ है, उनके लिए यह समय अतिरिक्त सतर्कता की मांग करता है। शल्यक्रिया के बाद आंखें कुछ समय तक अत्यंत कोमल और संवेदनशील रहती हैं। थोड़ी सी लापरवाही संक्रमण, सूजन या गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।

बाजार में उपलब्ध अधिकांश रंगों में रासायनिक तत्व मिलाए जाते हैं, जो आंखों की बाहरी परत और कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि केमिकल युक्त रंग आंखों में चला जाए तो जलन, खुजली, लालिमा, एलर्जी और संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। कई बार लोग घबराकर आंखों को रगड़ लेते हैं, जो स्थिति को और गंभीर बना सकता है। सही तरीका यह है कि आंखों को बिल्कुल न रगड़ा जाए, बल्कि तुरंत स्वच्छ और ठंडे पानी से धीरे-धीरे धोया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक से संपर्क किया जाए।

विशेष रूप से वे मरीज जिनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन हाल ही में हुआ है, उन्हें भीड़-भाड़ और खुले में रंग खेलने से बचना चाहिए। यदि बाहर निकलना अपरिहार्य हो, तो सुरक्षात्मक चश्मा पहनना अनिवार्य है। यह छोटा-सा उपाय आंखों को बड़ी समस्या से बचा सकता है। त्योहार के दिन अधिकांश अस्पतालों में नियमित ओपीडी सेवाएं सीमित रहती हैं, इसलिए पूर्व सावधानी ही सर्वोत्तम उपाय है। जागरूकता और जिम्मेदारी के साथ मनाया गया उत्सव ही सच्चे अर्थों में आनंददायक होता है।

डॉक्टर का वर्जन

डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा सक्सेना का कहना है कि, “होली के दौरान आंखों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनका हाल ही में मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ है। ऑपरेशन के बाद आंखें संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील रहती हैं। यदि केमिकल युक्त रंग आंखों में चला जाता है तो लालपन, सूजन और दर्द की समस्या बढ़ सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “यदि किसी की आंख में रंग चला जाए तो घबराएं नहीं और आंखों को बिल्कुल भी न रगड़ें। तुरंत साफ पानी से आंखों को अच्छी तरह धो लें। यदि जलन या धुंधलापन बना रहे तो बिना देरी किए चिकित्सक से संपर्क करें। सुरक्षात्मक चश्मा पहनना और भीड़ से बचना ऐसे मरीजों के लिए अत्यंत आवश्यक है।”

डॉ. मेघा सक्सेना ने यह भी बताया कि, “होली के दिन भले ही नियमित ओपीडी सेवाएं बंद रहती हैं, लेकिन आपातकालीन सेवाएं जारी रहती हैं। किसी भी गंभीर समस्या की स्थिति में मरीज लोहिया अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में संपर्क कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ को तत्काल बुलाया जाता है। मरीजों की सुविधा के लिए पहले से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाती हैं।”

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