मथुरा। ब्रज की पावन धरा पर रंगों का उल्लास चरम पर पहुंच गया, जब वृंदावन स्थित विश्वविख्यात श्री बांके बिहारी मंदिर में रंगभरनी एकादशी के अवसर पर ठाकुर बांकेबिहारी ने अपने भक्तों के साथ रंगों की होली खेली। शुक्रवार सुबह मंदिर के पट खुलते ही वातावरण “राधे-राधे” और “बिहारी जी की जय” के जयघोष से गूंज उठा।
सुबह आठ बजे जैसे ही ठाकुर जी श्वेत वस्त्र धारण कर हुरियारे के रूप में प्रकट हुए, श्रद्धालुओं की आंखें आनंद से भर उठीं। कमर में गुलाल की पोटली बंधे ठाकुर जी का अद्भुत श्रृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। सेवायतों ने ठाकुर जी के प्रतिनिधि स्वरूप पिचकारी से श्रद्धालुओं पर टेसू के फूलों से तैयार प्राकृतिक रंगों की वर्षा की। ठाकुर जी के प्रसाद रूपी रंग में सराबोर होकर भक्त भाव-विभोर हो गए।
मंदिर में रंगभरनी एकादशी का विशेष महत्व है। वसंत पंचमी से ही यहां होली उत्सव की शुरुआत हो जाती है, लेकिन रंगभरनी एकादशी से ठाकुर जी स्वयं भक्तों के साथ रंगों की होली खेलते हैं। इसके लिए मंदिर के सेवायत कई दिनों से टेसू के फूलों को भिगोकर पारंपरिक ढंग से रंग तैयार कर रहे थे। दोपहर तक मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी और दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं।
दोपहर बाद शुरू हुआ सजीव प्रसारण
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के निर्देश पर शुक्रवार से ठाकुर जी के दर्शन का सजीव प्रसारण भी प्रारंभ कर दिया गया है। सुबह आठ बजे से मंदिर परिसर और आसपास लगी एलईडी स्क्रीन पर दर्शन प्रसारित किए गए।
दोपहर एक बजे से विभिन्न इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लाइव प्रसारण शुरू हो गया, जिससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु घर बैठे ठाकुर जी के रंगोत्सव के दर्शन कर पा रहे हैं। यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर “takurjishribankebihariji” नाम से बनाए गए आधिकारिक पेजों पर यह प्रसारण उपलब्ध है।
मंदिर समिति के सदस्य एवं सेवायत दिनेश गोस्वामी ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक भक्त बिना असुविधा के ठाकुर जी के दिव्य दर्शन कर सकें।
ब्रज में अब होली का उल्लास अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में वृंदावन और मथुरा में फाल्गुनी रंगोत्सव की छटा और भी निखरेगी, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होने की संभावना है।


