फर्रुखाबाद। फागुनी पूर्णिमा के पावन अवसर पर छायावादी युग की महान कवयित्री सुश्री महादेवी वर्मा की जयंती श्रद्धा, सम्मान और साहित्यिक चेतना के साथ मनाई गई। नगर की दर्जनों सामाजिक, साहित्यिक एवं व्यापारिक संस्थाओं ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया तथा वर्तमान समय में व्याप्त गंदगी और अतिक्रमण की समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की।
कार्यक्रमों में बार-बार महादेवी वर्मा की अमर पंक्तियां— “मैं नीर भरी दुख की बदली…” — गूंजती रहीं। वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार महादेवी जी ने अपने समय में सामाजिक बंधनों, नारी शिक्षा और मानवीय संवेदनाओं की पीड़ा को शब्द दिए, उसी प्रकार आज भी समाज अनेक विसंगतियों से जूझ रहा है। नगर में बढ़ती गंदगी, अतिक्रमण और पर्यावरणीय असंतुलन को लेकर उपस्थित जनों ने इसे वर्तमान युग की पीड़ा बताया।
वक्ताओं ने कहा कि महादेवी वर्मा केवल एक कवयित्री नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की दीपशिखा थीं। उन्होंने नारी शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं में जागरण की भावना को अपनी रचनाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया। उनकी कृतियां ‘दीपशिखा’ और ‘अग्निरेखा’ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। साहित्य के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
नगर की साहित्यिक संस्थाएं— अभिव्यंजना, संस्कार भारती, दीप संस्था, अभिव्यक्ति वाणी संस्था, महादेवी स्मृति पीठ, पांचाल शोध संस्थान, फर्रुखाबाद महोत्सव, पांचाल साहित्य प्रकाशन तथा उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल सहित अनेक संगठनों ने संयुक्त रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर माननीय जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के साथ समवेत रूप से अनेक साहित्यकार, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में भूपेंद्र सिंह, महेंद्र पाल सिंह उपकारी, गणेश शुक्ला, बृज किशोर सिंह, राजेश निराला, रविंद्र भदौरिया, सुशिक्षण तिवारी, अनुराग पांडे, उपकार मणि, नलनीश श्रीवास्तव, राम शंकर, राजेश हजेला, अखिलेश अग्निहोत्री, राजू गौतम, सदानंद शुक्ला (जिला अध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल), सुरेंद्र पांडे (महामंत्री, कानपुर प्रांत संस्कार भारती), भारती मिश्रा, गौरव तिवारी, अनुराग अग्रवाल, संजय गर्ग, विनय अग्रवाल, राम शंकर अबोध, राम अवतार शर्मा, इंदु, अजय चौहान, निमित्त, चंदन, अनुभव सारस्वत, उदयपाल, छोटू सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महादेवी स्मृति पीठ द्वारा आयोजित गोष्ठी
महादेवी स्मृति पीठ की ओर से डॉक्टर शिव अंबर के निवास स्थान पर कवयित्री की स्मृति में एक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लेखकों की पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। वरिष्ठ आयकर अधिवक्ता राजन माहेश्वरी, श्रीमती ललिता माहेश्वरी, उत्कर्ष अग्निहोत्री, योगेश मिश्रा, बृज किशोर सिंह, राजीव मिश्रा, भूपेंद्र प्रताप सिंह, सुनील अवस्थी सहित अनेक साहित्यकार, समाजसेवी एवं पत्रकार उपस्थित रहे।
काव्य गोष्ठी में महादेवी वर्मा की रचनाओं का पाठ किया गया और उनकी स्मृतियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर शिव ओम अंबर ने किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि समाज को सचमुच स्वच्छ, संवेदनशील और जागरूक बनाना है तो महादेवी वर्मा की विचारधारा और साहित्यिक चेतना को आत्मसात करना होगा।
फागुनी पूर्णिमा पर गूंजा स्वर— “मैं नीर भरी दुख की बदली”, महादेवी वर्मा जयंती पर साहित्यिक संस्थाओं ने व्यक्त की वर्तमान पीड़ा


