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Friday, March 27, 2026

गैंगस्टर एक्ट में ऐतिहासिक फैसला: पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक को 6 साल की सजा, बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में कोर्ट सख्त

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औरैया

 

विशेष अदालत ने वर्ष 2020 के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड से जुड़े गैंगस्टर एक्ट मामले में बड़ा और कड़ा फैसला सुनाते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को 6 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस निर्णय के साथ ही अदालत ने अन्य सह-आरोपियों को 5-5 वर्ष के कारावास से दंडित किया, जबकि साक्ष्यों के अभाव में गनर अवनीश को दोषमुक्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में एक बार फिर इस सनसनीखेज हत्याकांड की चर्चा तेज हो गई है।

गौरतलब है कि 15 मार्च 2020 को औरैया शहर के पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में दिनदहाड़े अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। धार्मिक स्थल पर हुई इस दोहरे हत्याकांड की घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर दिया था, बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और क्षेत्र में कई दिनों तक तनाव की स्थिति बनी रही।

इस मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक सहित कुल 11 आरोपियों के नाम सामने आए। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए विस्तृत साक्ष्य जुटाए। बाद में विवेचक द्वारा मजबूत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई अहम गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। अदालत ने सभी तथ्यों, गवाहों के बयान और साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद कमलेश पाठक की भूमिका को गंभीर और मुख्य आरोपी के रूप में स्वीकार किया। इसी आधार पर उन्हें 6 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। अन्य आरोपियों की संलिप्तता को देखते हुए उन्हें 5-5 वर्ष की सजा दी गई।

हालांकि, मामले में शामिल गनर अवनीश के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हो सके, जिसके चलते अदालत ने उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि केवल आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि ठोस साक्ष्य होना अनिवार्य है।

इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और कानून के प्रति सख्ती का प्रतीक माना जा रहा है। लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवार को इस निर्णय से राहत मिली है। वहीं, यह फैसला समाज में यह स्पष्ट संदेश देता है कि चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के दायरे से बाहर नहीं है और गंभीर अपराधों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं आम जनता के बीच भी इस निर्णय को लेकर संतोष का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद इस चर्चित मामले में न्यायिक मुहर लगी है।

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