– एआई चैटबॉट ‘चाणक्य’ देगा हर सवाल का जवाब, तकनीकी संयोजन में अभिनय दीक्षित की अहम भूमिका
प्रशांत कटियार
फर्रुखाबाद: फर्रुखाबाद के पांचाल घाट गंगा तट पर 3 जनवरी से 3 फरवरी तक आयोजित होने वाला ऐतिहासिक रामनगरिया मेला अब डिजिटल दुनिया में नई पहचान बना रहा है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से मेले को तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे इसकी सात दशकों पुरानी विरासत अब ऑनलाइन संरक्षित की जा रही है।
मेला रामनगरिया, जिसे प्रयागराज के कुंभ की तर्ज पर आयोजित किया जाता है और गंगा किनारे लगने वाले देश के प्रमुख मेलों में गिना जाता है, अब अपनी ऐतिहासिक यात्रा को डिजिटल रूप में सहेज रहा है। इसके लिए एक समर्पित वेबसाइट तैयार की गई है, जिस पर बीते लगभग 70 वर्षों की गतिविधियों, आयोजन की झलकियों और ऐतिहासिक तथ्यों को संकलित किया जा रहा है।
अब तक 1000 से अधिक दुर्लभ और ऐतिहासिक तस्वीरें वेबसाइट पर अपलोड की जा चुकी हैं। आने वाले समय में बाहरी जनपदों और अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन, ठहराव, पार्किंग, स्नान घाट और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस वेबसाइट की सबसे बड़ी विशेषता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट ‘चाणक्य’। यह चैटबॉट मेला रामनगरिया से जुड़े हर प्रश्न का त्वरित उत्तर देने में सक्षम है। इसे गूगल जेमिनी एआई से जोड़ा गया है, जिससे यह और अधिक सटीक व आधुनिक जानकारी प्रदान करता है।
अब श्रद्धालु और शोधार्थी मेले के इतिहास, आयोजन तिथियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों या व्यवस्थाओं से जुड़ा कोई भी प्रश्न सीधे ‘चाणक्य’ से पूछ सकते हैं। वेबसाइट के तकनीकी अपडेट और कंटेंट प्रबंधन का कार्य देख रहे अभिनय दीक्षित इस डिजिटल पहल के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जिस समर्पण और तकनीकी दक्षता के साथ मेले की ऐतिहासिक धरोहर को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सहेजने का बीड़ा उठाया है, वह सराहनीय है।
अभिनय दीक्षित ने यूथ इंडिया से बातचीत में बताया कि उनका लक्ष्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि रामनगरिया मेले को वैश्विक पहचान दिलाना है। आने वाले समय में वेबसाइट को बहुभाषीय और और अधिक इंटरएक्टिव बनाने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।
आस्था और तकनीक का संगम
रामनगरिया मेला सदियों से आस्था, तप और सांस्कृतिक समागम का केंद्र रहा है। अब तकनीक के सहारे यह परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंचेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से न केवल मेले का इतिहास सुरक्षित रहेगा, बल्कि देश-विदेश के लोग भी इसकी भव्यता और महत्ता से परिचित हो सकेंगे।
यूथ इंडिया इस अभिनव पहल का स्वागत करता है। आस्था और आधुनिक तकनीक के इस संगम ने यह साबित कर दिया है कि जब संकल्प मजबूत हो, तो परंपरा भी डिजिटल क्रांति का हिस्सा बन सकती है और इस परिवर्तन के केंद्र में हैं युवा तकनीकी सोच के प्रतीक, अभिनय दीक्षित।


