सोलन: हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में हाल ही में गिरि लिफ्ट पेयजल योजना (drinking water scheme)के ठप होने के बाद सोलन और आसपास के इलाकों में पेयजल संकट और गहरा गया है। इसी योजना के तहत शहर को पानी की आपूर्ति की जाती है। शहर के कई हिस्सों में चौथे-पांचवें दिन ही पेयजल की आपूर्ति हो रही है। इसके अलावा, यह भी दावा किया जा रहा है कि पिछले सप्ताह बिजली कटौती के कारण भी गिरि पेयजल योजना बाधित हुई थी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कुछ अधिकारी सोलन में सिर्फ समय बिता रहे हैं और जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग मनमाने ढंग से उपभोक्ताओं को पेयजल उपलब्ध करा रहा है, जिससे सरकार की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। जल शक्ति विभाग के अधिकारी समस्या के लिए अलग-अलग जवाब दे रहे हैं, जैसे कि गिरि और अश्विनी नदियों में गाद का स्तर बढ़ गया है, वोल्टेज की समस्या है, मुख्य पाइपलाइन में खराबी है, या मोटरें खराब हो गई हैं। जल शक्ति विभाग वर्षों से इसी तरह काम कर रहा है, जिससे जनता को असुविधा हो रही है।
ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी सोलन शहर के निवासियों को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इसके अलावा, ये अधिकारी विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों की पूरी तरह अनदेखी कर रहे हैं। कुछ अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने पेयजल की स्थिति के बारे में अपने वरिष्ठों को सूचित कर दिया है, इसलिए वे जनता, सत्ताधारी दल या विपक्षी नेताओं के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।
स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि शहर के कई इलाकों में, जिनमें सप्रून और पावर हाउस रोड शामिल हैं, जहां जल शक्ति विभाग पेयजल की आपूर्ति करता है, वहां भी चार से पांच दिनों के बाद पेयजल की आपूर्ति हो रही है, और वह भी निश्चित नहीं है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि अगर जल शक्ति विभाग के अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो वे अधिकारियों का घेराव करेंगे।
इस बीच, कांग्रेस और भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता की बार-बार शिकायतों के बावजूद, अधिकारी पेयजल समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और अपने कार्यालयों से समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो प्रशासन, न ही नगर निगम और न ही जल शक्ति विभाग के अधिकारी पेयजल समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा इस मुद्दे को हल न करने के कारण सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।


