प्रयागराज।.इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नौकरशाहों के नाम के आगे ‘माननीय’ शब्द के प्रयोग पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे संविधान की भावना के विरुद्ध बताया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि माननीय शब्द केवल मंत्रियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए है, न कि प्रशासनिक अधिकारियों या नौकरशाहों के लिए।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि अफसरों को माननीय कहना एक गलत परंपरा बनती जा रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। न्यायालय ने कहा कि नौकरशाही का कार्य शासन को संचालित करना है, न कि जनप्रतिनिधियों के समान विशेष सम्मान या उपाधि प्राप्त करना।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विशेष रूप से ‘माननीय एडिशनल कमिश्नर’ जैसे संबोधनों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के शब्द प्रशासनिक पदों को अनावश्यक रूप से राजनीतिक या संवैधानिक गरिमा देने का प्रयास हैं, जो स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने माना कि ऐसे संबोधन से जनता के बीच यह संदेश जाता है कि नौकरशाह और जनप्रतिनिधि समान स्तर पर हैं, जबकि संविधान में दोनों की भूमिकाएं स्पष्ट रूप से अलग-अलग परिभाषित की गई हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब मांगा है कि किस नियम, परंपरा या आदेश के तहत अधिकारियों के नाम के आगे माननीय शब्द का प्रयोग किया जा रहा है। कोर्ट ने संकेत दिए कि यदि इस पर कोई ठोस आधार नहीं पाया गया, तो भविष्य में इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि संविधान में मंत्रियों और विधायकों को जनता द्वारा चुना जाता है, इसलिए उन्हें माननीय कहा जाता है। वहीं, अफसर नियुक्त होते हैं और उनकी जवाबदेही शासन व्यवस्था के प्रति होती है, न कि जनता के सीधे जनादेश से।
मामले की अगली सुनवाई में सरकार के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।


