प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार पर कड़ा रुख अपनाते हुए 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना रायबरेली से जुड़े एक मामले में अवैध तोड़फोड़ और रेवेन्यू रिकॉर्ड में बिना सक्षम आदेश के बदलाव को लेकर लगाया गया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कार्रवाई कानून के दायरे से बाहर जाकर की गई। कोर्ट ने यह भी माना कि संबंधित याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर तक नहीं दिया गया, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि बिना सुनवाई के की गई ऐसी कार्रवाई मामले की गंभीरता को और बढ़ा देती है।
न्यायालय ने कहा कि
बिना वैधानिक आदेश के तोड़फोड़ करना,और राजस्व अभिलेखों में मनमाने ढंग से परिवर्तन करना,
लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के विपरीत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन मनमानी नहीं कर सकता और हर कार्रवाई कानून व प्रक्रिया के अनुरूप ही होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए इसे केवल आर्थिक दंड नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए चेतावनी बताया। अदालत का मानना है कि इस तरह के मामलों में कठोर आदेश आवश्यक हैं, ताकि भविष्य में बिना प्रक्रिया अपनाए कोई कार्रवाई न की जाए।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नजीर है। इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि“कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह सरकार ही क्यों न हो।”
इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि भविष्य में तोड़फोड़ व राजस्व मामलों में अधिक सतर्कता बरती जाएगी।

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